Suvichar In Hindi – 🌸 पढ़े नए सुविचार और Quotes हिंदी में 🙏

प्रिय दोस्तों मै आज आपके लिए लेकर आया हूँ Suvichar In Hindi | आप हमारे इस लेख में पढ़ सकते है Suvichar In Hindi के बारे में पूरी जानकारी और इनफार्मेशन | आईये शुरू करते है Suvichar In Hindi.

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सार्थक कला रचनाकार की प्रसन्नता, समाधान और पवित्रता की गवाह होती है।

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सच्ची अहिंसा मृत्युशैया पर भी मुस्कराती रहेगी। अहिंसा ही वह एकमात्र शक्ति है जिससे हम शत्रु को अपना मित्र बना सकते हैं और उसके प्रेमपात्र बन सकते हैं |

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स्वच्छता, पवित्रता और आत्म-सम्मान से जीने के लिए धन की आवश्यकता नहीं होती।

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संपूर्ण विश्व का इतिहास उन व्यक्तियों के उदाहरणों से भरा पडा है जो अपने आत्म-विश्वास, साहस तथा दृढता की शक्ति से नेतृत्व के शिखर पर पहुंचे हैं।

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 सत्याग्रह और चरखे का घनिष्ठ संबंध है तथा इस अवधारणा को जितनी अधिक चुनौतियां दी जा रही हैं इससे मेरा विश्वास और अधिक दृढ होता जा रहा है।

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सभ्यता का सच्चा अर्थ अपनी इच्छाओं की अभिवृद्धि न कर उनका स्वेच्छा से परित्याग करना है।

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 समुद्र जलराशियों का समूह है। प्रत्येक बूंद का अपना अस्तित्व है तथापि वे अनेकता में एकता के द्योतक हैं।

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स्त्री का अंतर्ज्ञान पुरुष के श्रेष्ठ ज्ञानी होने की घमंडपूर्ण धारणा से अधिक यथार्थ है।

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स्वामी की आज्ञा का अनिवार्य रूप से पालन करना परतंत्रता है परंतु पिता की आज्ञा का स्वेच्छा से पालन करना पुत्रत्व का गौरव प्रदान करती है।

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 मनुष्य अक्सर सत्य का सौंदर्य देखने में असफल रहता है, सामान्य व्यक्ति इससे दूर भागता है और इसमें निहित सौंदर्य के प्रति अंधा बना रहता है।

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 मैं यह अनुभव करता हूं कि गीता हमें यह सिखाती है कि हम जिसका पालन अपने दैनिक जीवन में नहीं करते हैं, उसे धर्म नहीं कहा जा सकता है।

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मेरे विचारानुसार गीता का उद्देश्य आत्म-ज्ञान की प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग बताना है।

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मनुष्य अपनी तुच्छ वाणी से केवल ईश्वर का वर्णन कर सकता है।

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मेरे विचारानुसार मैं निरंतर विकास कर रहा हूं। मुझे बदलती परिस्थितियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना आ गया है तथापि मैं भीतर से अपरिवर्तित ही हूं।

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महाभारत के रचयिता ने भौतिक युद्ध की अनिवार्यता का नहीं वरन् उसकी निरर्थकता का प्रतिपादन किया है।

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मनुष्य तभी विजयी होगा जब वह जीवन-संघर्ष के बजाय परस्पर-सेवा हेतु संघर्ष करेगा।

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मज़दूर के दो हाथ जो अर्जित कर सकते हैं वह मालिक अपनी पूरी संपत्ति द्वारा भी प्राप्त नहीं कर सकता।

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अहिंसा एक विज्ञान है। विज्ञान के शब्दकोश में ‘असफलता’ का कोई स्थान नहीं।

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अधभूखे राष्ट्र के पास न कोई धर्म, न कोई कला और न ही कोई संगठन हो सकता है।

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आत्मरक्षा हेतु मारने की शक्ति से बढ़कर मरने की हिम्मत होनी चाहिए।

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केवल बुद्धि के द्वारा ही मानव का मनुष्यत्व प्रकट होता है।

अन्य लेख

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 कार्यकुशल व्यक्ति की सभी जगह जरुरत पड़ती है।

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गुण छोटे लोगों में द्वेष और महान व्यक्तियों में स्पर्धा पैदा करता है।

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 कार्यकुशल व्यक्ति के लिए यश और धन की कमी नहीं है।

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मनुष्य अपने गुणों से आगे बढता है न कि दूसरों कि कृपा से।

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यदि तुम अपने आपको योग्य बना लो, तो सहायता स्वयमेव तुम्हे आ मिलेगी।

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महान व्यक्ति न किसी का अपमान करता है ओर न उसको सहता है।

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 नैतिक बल के द्वारा ही मनुष्य दूसरों पर अधिकार कर सकता है।

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मनुष्य धन अथवा कुल से नहीं, दिव्य स्वभाव और भव्य आचरण से महान बनता है।

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 ज्ञानी वह है, जो वर्तमान को ठीक प्रकार समझे और परिस्थिति के अनुसार आचरण करे।

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क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है।

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मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है।

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क्रोध करने का मतलब है, दूसरों की ग़लतियों कि सजा स्वयं को देना।

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जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो।

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क्रोध से धनि व्यक्ति घृणा और निर्धन तिरस्कार का पात्र होता है।

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क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ और पश्चाताप पर खत्म होता है।

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क्रोध के सिंहासनासीन होने पर बुद्धि वहां से खिसक जाती है।

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जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है।

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क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है। अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए।

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क्रोध से मूढ़ता उत्पन्न होती है, मूढ़ता से स्मृति भ्रांत हो जाती है, स्मृति भ्रांत हो जाने से बुद्धि का नाश हो जाता है और भ्द्धि नष्ट होने पर प्राणी स्वयं नष्ट हो जाता है।

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