Story In Hindi For Kids – बच्चों के लिए रोचक और मज़ेदार कहानियाँ हिंदी में 📌

Story In Hindi For Kids

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हू Story In Hindi For Kids |  ये कहानियाँ बहुत रोचक और मज़ेदार है | इन कहानियो से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है Story In Hindi For Kids

Story In Hindi For Kids

Story In Hindi For Kids – सुनहरी चिड़िया 🐓

एक जंगल में एक सुनहरी चिड़िया रहती थी। वह मीठे गीत गाया करती थी। वह गाना गाती तो उसकी चोंच से चमकदार मोती गिरते। एक दिन एक बहेलिए ने उसे पकड़ लिया। उसने उसे अपने घर ले जाकर एक सोने के पिजड़े में रख दिया। वह उसे अच्छा खाना देता, लेकिन चिड़िया दुखी रहती।

वह आजादी का आनंद लेना चाहती थी। अब वह पिंजड़े में गाना भी नहीं गाती थी। इस वजह से बहेलिए को एक भी मोती नहीं मिल पा रहा था। तंग आकर बहेलिए ने उस सुनहरी चिड़िया को राजा को उपहार स्वरूप भेंट कर दी। राजा ने वह चिड़िया राजकुमारी को दे दी।

राजकुमारी एक अच्छी लड़की थी। वह बहुत दयालु थी। उसने सुनहरी चिड़िया को आजाद कर दिया। चिड़िया अपनी आजादी से बहुत खुश थी, इसलिए वह पुन: गाने लगी।

फलस्वरूप से उसकी चोंच राजकुमारी के कमरे में मोती गिरने लगे। उस दिन से वह सुनहरी चिड़िया रोज राजकुमारी से मिलने आती और उसके लिए गाना गाती। वह जैसे ही गाना गाती वैसे ही उसकी चोंच से मोती झड़ते |

यह उसकी तरफ से प्यारी राजकुमारी के लिए तोहफा था  ।

 बुद्धिमान यात्री -Story In Hindi For Kids 💂‍♀️

एक यात्री घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहा था। एक जंगल को पार करते समय उसे थकान महसूस होने लगी। इसलिए वह घोड़े से नीचे उतरा और एक छायादार वृक्ष के नीचे लेट गया। जल्दी ही उसे नींद आ गई। उसका घोड़ा वहीं पास में चरने लगा |

कुछ घंटों बाद यात्री उठा तो उसने देखा कि उसका घोड़ा गायब है। उसने उसे वहाँ चारों तरफ ढूंढा, लेकिन उसे घोड़ा नहीं मिला। तब उसने अपना मोटा डंडा उठाया और घोड़ा चोर को ढूंढने लगा। घोड़े को ढूंढते- ढूंढते वह नजदीक के गाँव में पहुँच गया।

वहाँ पर उसने अपना डडा घुमाते हुए चिल्लाकर कहा, मेरा घोड़ा किसने चुराया है? जिसने भी ये कार्य किया है वह मेरा घोड़ा लौटा दे, अन्यथा मैं वही करूंगा जो मैंने पिछली बार किया था। चोर उसी गाँव का था। उसकी बात सुनकर चोर डर गया और वह तुरंत घोड़े को ले आयाफिर वह यात्री केसामने हाथ जोड़कर बोला, ‘मुझे । माफ कर दो। ये रहा तुम्हारा घोडा।

लेकिन ये तो बताओ कि जब पिछली बार तुम्हारा घोड़ा चोरी हुआ था, तब तुमने क्या किया था?” बुद्धिमान यात्री बोला, ‘कुछ भी नहीं मैंने नया घोड़ा खरीद लिया था।” ये कहकर वह जोर-जोर से हंसने लगा।

राजा विक्रमादित्य – Story In Hindi For Kids 🖼

विक्रमादित्य एक महान राजा थे। वे अपने न्याय के लिए प्रसिद्ध थे। एक दिन वे नदी के तट पर घूमने गये। उन्हें वह स्थान बहुत अच्छा लगा। इसलिए उन्होंने अपने प्रधानमंत्री को वहाँ पर एक सुंदर महल बनाने का आदेश दिया।

राजा का आदेश पाकर प्रधानमंत्री उस स्थान का निरीक्षण करने के लिए वहाँ गए। लेकिन जल्दी ही वह  वहाँ से वापस आ गए और राजा विक्रमादित्य से बोले, ”महाराज जहाँ पर महल बनना है, ठीक वहीं पर एक बूढ़ी औरत की झोंपड़ी है। इससे महल की सुंदरता खंडित होगी।”

राजा विक्रमादित्य ने बुढ़िया को दरबार में उपस्थित करने का आदेश दिया। अगले दिन वह बूढ़ी औरत राजा से मिलने आई राजा विक्रमादित्य ने उससे अपनी झोंपड़ी छोड़ने के बदले धन देने की पेशकश की तो वह बोली, ‘मैं अपनी झोंपड़ी नहीं छोड़ेंगी। वह मेरे स्वर्गीय पति की निशानी है। कोई भी मुझे उस झोंपड़ी से अलग नहीं कर सकता।

उस वृद्धा औरत का यह उत्तर सुनकर राजा को उसकी भावनाओं का अहसास हुआ और उन्होंने वहाँ पर महल बनवाने का इरादा त्याग दिया। सभी लोगों ने विक्रमादित्य के इस आदेश की प्रशंसा की।

Story In Hindi For Kids – बुद्धिमान गंगा 👩

महेश एक जुआरी था। उसकी जुआ खेलने की आदत से उसकी पत्नी गंगा बड़ी परेशान थी। एक दिन महेश जुए में सोनू से बहुत सारा पैसा हार गया। सोनू ने उससे पैसा माँगा। लेकिन महेश के पास उसे देने के लिए पैसे नहीं थे। तब सोनू बोला, कल मैं तुम्हारे घर आऊंगा और जिस भी पर वस्तु सबसे पहले मेरा हाथ पडेगा, वह मेरी हो जाएगी। ”

महेश अपने घर गया और सारी बात अपनी पत्नी को कह सुनाई। वह बोली, “मैं तुम्हारी मदद सिर्फ इस शर्त पर कहेगी, कि तुम अब कभी जुआ नहीं खेलोगे। मुझसे इस बात का वादा करो” महेश ने जुआ छोड़ने का वादा कर लिया। गंगा ने सारा कीमती सामान एक संदूक में भरकर संदूक को ऊंचाई पर रख दिया।

अगले दिन सोनू उनके घर आया वह जानता था कि सारा सामान एक संदूक में रखा है। वह उस तक पहुँचने के लिए वहाँ लगी सीढ़ी से चढ़ने लगा। उसने जैसे ही सीढ़ी को छुआ, गंगा बोली, “रुको तुम्हारे कहे अनुसार ये सीढ़ी तुम्हारी हुई क्योंकि तुमने सबसे पहले इसे ही छुआ है।” बेचारा सोनू
दुखी मन से वहाँ से चला गया।

 दसवां व्यक्ति – Story In Hindi For Kids 🙏

सोहन एक बेरोजगार युवक था। वह कुछ कार्य करना चाहता था। इसलिए उस ने महल के द्वार पर खड़े होकर राजा से नौकरी मांगने का निर्णय लिया। अगले दिन वह महल के द्वार पर खड़े होकर राजा का इंतजार करने लगा।

समय व्यतीत करने के लिए वह महल के अंदर आने जाने वाले व्यक्तियों की गिनती करने लगा। पूरे दिन उसने अन्दर जाने वाले दस अजनबी व्यक्तियों की गिनती की। लेकिन शाम तक उनमें से सिर्फ नौ ही व्यक्ति बाहर आए थे।

शाम को जब राजा महल से बाहर आए तो सोहन ने उनसे नौकरी की। बात की लेकिन दुर्भाग्यवश राजा ने उसे मना कर दिया। तब सोहन ने राजा से कहा, ‘महाराज, महल के अंदर जाने वाले दस अजनबियों में से सिर्फ नौ ही अजनबी बाहर आए हैं। एक व्यक्ति अब भी अंदर ही है।”

यह सुनकर राजा ने उसी वक्त अपने सैनिकों को उस दसवें व्यक्ति को ढूंढने का आदेश दिया | वह व्यक्ति राजा के ही कमरे में छुपा हुआ था। सैनिकों ने उसे पकड़ लिया। वह व्यक्ति दुश्मन देश का जासूस था, जो राजा को मारने आया था। यह देखकर राजा सोहन से बहुत खुश हुआ और उसने उसे अपना अंगरक्षक बना लिया।

 काजी का न्याय – Story In Hindi For Kids 🕺

एक दिन तीन भाई न्याय पाने के लिए काजी के पास गए। उनका मामला बड़ा अनोखा था। वे काजी से बोले,”हमारे पिता की मृत्यु हो चुकी है। मरने से पहले हमारे पिता ने कहा था कि आधी जायदाद बड़े बेटे की होगी, जायदाद का एक-चौथाई हिस्सा दूसरे बेटे और जायदाद का छठवाँ हिस्सा तीसरे बेटे का होगा।

इसलिए हमने उनकी मृत्यु के बाद जमीन-जायदाद को उसी तरह बाँट लिया। लेकिन हम ग्यारह ऊंटों को नहीं बाँट पा रहे हैं। हम उन्हें किस प्रकार बाँटे?” उनकी बात सुनकर कुछ देर तो काजी सोच में…. पड़ गया लेकिन फिर बोला,”यदि तुम्हें एतराज न हो तो मैं तुम्हारे पशु समूह में अपने ऊंट को भी शामिल करना चाहता हूं।”

वे बोले, ‘नहीं, हमें कोई एतराज नहीं है।” अब उनके पास बारह ऊंट हो गए थे। तब बड़े बेटे को बारह ऊंटों के आधे छह ऊंट मिले वहीं दूसरे बेटे को एक-चौथाई के हिसाब से तीन ऊंट मिले और सबसे छोटे बेटे के हिस्से छठवें भाग के हिसाब से दो ऊंट आए | बटवारा करने के बाद काजी ने अपना ऊंट वापस ले लिया तीनों भाई काजी के चतुराईपूर्ण न्याय से बहुत खुश थे।

अन्य लेख

सोच-समझकर बोलो – Story In Hindi For Kids 🐶

एक गाँव में एक किसान और उसकी पत्नी रहते थे | एक बार देवी को उनकी गरीबी पर दया आ गई। वह उनके पास आई और बोली, “तुम लोग वर्षों से गरीबी में रह रहे हो। इसलिए मैं तुम्हारी सहायता करना चाहता हूँ।

तम लोग आज जो भी तीन इच्छाएँ करोगे वे तुरंत ही पूरी हो जाएंगी।” वे बोले,‘‘इस दया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद | उस रात वे रसोई में बैठकर सोच रहे थे कि क्या इच्छा की जाए। तभी किसान की पत्नी बोली,‘‘मेरी चिकन खाने की बड़ी इच्छा है।” उसके ऐसा कहते ही प्लेट में चिकन प्रकट हो गया।

किसान ने उसे डाँटते हुए कहा, “बेवकूफ औरत! तुमने एक वरदान बर्बाद कर दिया |यह चिकन तुम्हारी नाक पर चिपक जाए।”उसने जैसे ही यह बोला, “चिकन उसकी पत्नी की नाक पर चिपक गया। यह देखकर वे दोनों डर गए | पत्नी बोली, ‘मेरी इच्छा है।कि यह चिकन मेरी नाक से छूट जाए।”

ऐसा कहते ही चिकन उसकी नाक से हट गया। इस तरह उनके तीनों वरदान व्यर्थ हो चुके थे। इस प्रकार उन दोनों ने अपनी बेवकूफी के कारण बोलने से पहले सोचा नहीं और अमीर बनने का सुनहरा मौका गंवा दिया।

अंतिम इच्छा -Story In Hindi For Kids 🎀

एक राजा थे। उनके दरबार में एक विदूषक था। वह बहुत चालाक था। वह न सिर्फ अच्छे-अच्छे चुटकले सुनाता था, बल्कि शासन के कायों में भी राजा को सहायता करता था। वह विदूषक कई बार तो राजा के ऊपर ही किस्से बनाकर सुना दता था।

एक दिन राजा को उसकी किसी बात से अपना अपमान महसूस हुआ। वे क्रोधित होते हुए बोले, ‘सैनिको इस उद्दंड आदमी को बंदी बना कर कैद खाने में डाल दो। कल इसे फाँसी दी जाएगी।”

अगले दिन विदूषक को दरबार में लाया गया। राजा उससे बोले‘तुम्हें जल्दी ही फाँसी दे दी जाएगी। यदि तुम्हारी कोई अंतिम इच्छा हो तो हमें बताओ?” उसे अवश्य ही पूरा किया जाएगा। यह सुनकर उस चालाक विदूषक ने कहा ”महाराज मेरी अंतिम इच्छा है कि मैं बुढ़ापे की मौत मरू। ”

उसकी बात सुनकर राजा को हँसी आ गईउन्होंने उसे माफ कर दिया। इस प्रकार चतुर विदूषक ने चालाकी से अपनी जिंदगी बचा ली।

जैसी करनी वैसी भरनी – Story In Hindi For Kids 🛠

एक बूढ़ा सन्यासी था। अपने जीवन-यापन के लिए वह प्रतिदिन पास के गाँव में जाकर भिक्षा मांगता था। यद्यपि वह भिक्षा मांगकर पेट भरता था,परन्त फिर भी अपना भोजन जरूरतमंदों के साथ अवश्य बाँटता था। एक दिन वह एक वृद्धा के घर भिक्षा मांगने के लिए गया।

उसने भिक्षा माँगी तो उस वृद्धा ने भोजन न होने का बहाना बनाकर उसे टाल दिया। अगले दिन एक बार फिर वह वृद्धा के घर भिक्षाटन के लिए गया | यह देखकर वृद्धा बुरी तरह चिढ़ गई। उसने खाने में जहर मिलाकर सन्यासी को दे दिया। सन्यासी ने भोजन लिया और अपनी कुटिया में वापस आ गया।

वह जैसे ही भोजन करने बैठा तभी एक युवक उसके पास आया और बोला, “मैं बहुत भूखा हूँ।
कृपया मुझे खाने के लिए कुछ भोजन दे दो।” सन्यासी ने पूरा भोजन उसे ही दे दिया। युवक ने जैसे ही भोजन खाया | उसे उल्टियां होने लगीं और थोड़ी ही देर बाद वह मर गया।

यह देखकर सन्यासी आश्चर्यचकित रह गया। वास्तव में वह युवक और कोई नहीं उसी वृद्धा का इकलौता पुत्र था। इस प्रकार अपनी दुष्ट प्रवृत्ति के कारण उस वृद्धा ने अपने इकलौते पुत्र को खो दिया | किसी ने ठीक ही कहा है- जैसी करनी वैसी भरनी।

Story In Hindi For Kids – हठ का परिणाम 🕶

एक ब्राह्मण था। उसके पास सब कुछ था, बस कमी थी तो एक पुत्र की। इसलिए वह सभी सुख-सुविधाएं होने के बावजूद भी दुखी रहता था। उसने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान से कई बार प्रार्थना की। यहाँ तक कि उसने घर छोड़ दिया और हिमालय पर जाकर कई वर्षों तक भगवान तपस्या की।

उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और बोले, ‘‘पुत्र माँगो, क्या माँगते हो?” ब्राह्मण बोला,‘‘भगवान, मैं एक पुत्र चाहता हूँ।’ भगवान बोले“पुत्र, मैं तुम्हारी यह इच्छा पूरी नहीं कर सकता। कुछ और माँग लो?’

ब्राह्मण बोला,”नहीं, मुझे सिर्फ पुत्र ही चाहिए।’’ भगवान बोले, “मैं तुम्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देता हूं। लेकिन ये हमेशा याद रखना कि अधिक हठ दुख को जन्म देता है।” जल्दी ही ब्राह्मण को एक पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई | बड़ा होते-होते वह बहुत ही उद्दंड हो गया। वह झूठा और बेईमान भी था।

दुष्ट बेटे की वजह से ब्राह्मण का नाम मिट्टी में मिल गया। तब ब्राह्मण सोचने लगा, ‘भगवान ने सत्य ही कहा था।

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