Panchtantra Ki Kahani In Hindi – 20+ पंचतंत्र की कहानी पढ़े हिंदी में

हम अपने इस लेख में आपके लिए लेकर आये है पंचतंत्र की कहानी | Panchtantra Ki Kahani बहुत ही रोचक और मज़ेदार है | 

हरी-भरी धरती – Panchtantra Ki Kahani

भगवान ने सबसे पहले खूबसूरत हरी-भरी धरती बनाई। धरती पर घास के हरे मैदान और हरे-भरे पेड़ बनाए। भगवान ने पशु-पक्षी भी बनाए। अन्तत: उसने अपने इस सुंदर सृजन की देखभाल के लिए मनुष्य को । साथ ही ईश्वर ने मनुष्य को चेतावनी देते हुए कहा‘तुम हमेशा धरती की
बनाया|

हरियाली एवं उसकी खूबसूरती को सुरक्षित रखना। ठीक उसी तरह, जिस तरह मैंने इसे बनाया है। कभी कोई पाप कर्म नहीं करना, जिससे कि धरती अपनी सुंदरता खो बैठे। यह चेतावनी देने के बाद भगवान ने मनुष्य को धरती पर भेजा। लेकिन जल्दी ही मुनष्य भगवान की चेतावनी को भूल गया।

उसने चोरी, हत्या, झूठ बोलना, पेड़ों को काटना जैसे पाप-कर्म करने शुरू कर दिए | इस वजह से धरती की सुंदरता खो गई और वह
मरुस्थल में परिवर्तित हो गई। अब मनुष्य अपने किए पर पछता रहा था।

तब उसने भगवान से माफी माँगी। फिर भगवान ने उसे क्षमा कर दिया।

 

Panchtantra Ki Kahani – हाथी की ठंड

बहुत समय पहले की बात है, जब हाथी की मूंड छोटी होती थी। तब आज की सूडों जैसी लम्बी नहीं थी। एक दिन हाथी नदी के तट पर पानी पीने गया। उसे वहाँ एक मगरमच्छ दिखाई दिया। हाथी ने मगरमच्छ को छेड़ते हुए कहा”अरे! तुम तो एक रेंगने वाले जीव हो।

मुझे समझ नहीं आता कि तुम्हारा शरीर इतना लंबा क्यों है?” मगरमच्छ ऐसे अपमानजनक शब्द सुनकर अपना आपा खो बैठा। वह गुस्से
से बोला, ‘‘मैं तुम्हें अपने शरीर का उपयोग अभी दिखाता हूं।”

यह कहते हुए मगरमच्छ ने तीव्रता से हाथी की सूंड अपने मुंह में पकड़ ली। हाथी दर्द के मारे चिल्लाने लगा। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर सियार, घोड़ा, जिराफ आदि जानवर उसकी सहायता के लिए आ गए और हाथी की सूंड को मगरमच्छ के मुंह से छुड़ाने के लिए उसकी पूंछ पकड़कर खींचने लगे।

आगे और पीछे दोनों ओर से खींचने के कारण हाथी की सूंड  लंबी हो गई जैसी कि वह आजकल दिखाई देती है।

Panchtantra Ki Kahani-अपनी मदद आप

एक बार एक धनी व्यापारी व्यापार के उद्देश्य से पानी के जहाज द्वारा अपने शहर से दूसरे शहर जा रहा था। वह अपने साथ कीमती रत्न एवं सोने के सिक्कों से भरा एक संदूक भी ले जा रहा था।

रास्ते में तूफान आ गया। जहाज इधर-उधर हिलोरें लेने लगा। कुछ घंटों के बाद तूफान तो थम गया, लेकिन जहाज की तली में एक छेद हो गया | अब जहाज में पानी भरने लगायह देखकर कुछ लोग जहाज में ही डूब गए और कुछ सौभाग्यशाली तैरकर किनारे पहुँच गए। यह देखकर व्यापारी ने प्रार्थना करनी शुरू की, ‘‘हे भगवान!

कृपा करके मेरा जीवन बचा लो।’ एक व्यक्ति व्यापारी के पास गया और बोला, “कूदो और तैरकर समुद्र के किनारे पहुँचो। भगवान उसकी मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करते हैं।” लेकिन व्यापारी ने उसकी एक न सुनी। वह जहाज में ही रहा। थोड़ी देर में जहाज डूब गया और वह व्यापारी जहाज के साथ डूबकर अकाल मृत्यु का ग्रास बना।

Panchtantra Ki Kahani – जादुई जूते

जंगल के राजा शेर का जन्मदिन था। उसने जंगल के सभी जानवरों को अपने जन्मदिन के समारोह में आमंत्रित किया| सभी जानवर शेर के लिए उपहार लेकर आए। शेर की माँद पर सभी जानवर उपस्थित थे, बस लोमड़ी अनुपस्थित थी।

यह देखकर लोमड़ी के दुश्मन भेड़िए को उसे मुश्किल में डालने का एक अच्छा मौका मिल गया। सियार बोला, ‘महाराज लोमड़ी आपको शुभकामना देने नहीं आई | यह तो सरासर आपकी बेइज्जती हुई।

लोमड़ी आपकी खुशी में शामिल ही नहीं होना चाहती, तभी तो वह नहीं आई| ठीक उसी समय लोमड़ी वहाँ पहुँच गई। उसने भेड़िए की बात सुन ली थी। चालाक लोमड़ी ने कुछ देर सोचने के बाद कहा,”महाराज मैं आपके लिए जादुई जूते लेने गई हुई थी।

लेकिन बदकिस्मती से नहीं ला पाई। शेर ने पूछा, ‘क्यों? लोमड़ी ने जवाब दिया, क्योंकि जूते बनाने के लिए वहाँ पर भेड़िए की खाल नहीं मिल पाई थी।” यह सुनते ही भेड़िया वहाँ से अपनी जान बचाकर भागा।

 गरीब प्रबत – Panchtantra Ki Kahani

एक गाँव में एक निर्धन व्यक्ति रहता था। वह इतना निर्धन था कि मुश्किल से अपने परिवार के लिए एक वक्त का खाना जुटा पाता था। लेकिन उसने कभी अपनी निर्धनता की शिकायत किसी से नहीं की।

उसके पास जो कुछ था, वह उसी में संतुष्ट था। वह देवी का बहुत बड़ा भक्त था। इसीलिए वह पूजा करने के लिए हमेशा मंदिर जाता था। मंदिर जाने के बाद ही वह अपने कार्य पर जाता था।

एक दिन देवी को अपने इस गरीब भक्त पर दया आ गई। इसलिए एक दिन सुबह -सुबह उसने अपनी दैवी शक्ति से मंदिर के बाहर एक सोने के सिक्कों से भरा थैला रख दिया। वह भक्त मंदिर आया और आँखें बंद करके मंदिर के चारों ओर दे का ध्यान करते हुए परिक्रमा करने लगा। आँखें बंद होने के कारण वह चला ।

यह के सिक्कों से भरा थैला नहीं देख पाया और यूं ही गया देख देवी ने सोचा, ‘समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ मिलता। ‘

Panchtantra Ki Kahani – बड़बोला शिकारी

एक शिकारी था। उसे शेखी बघारने की आदत थी। वह प्राय: सभी को अपनी बहादुरी के झूठे किस्से सुनाते हुए कहता कि किस तरह एक शेर
उससे डरकर भाग गया था। उसका कहना था कि जंगली जानवर उसके आसपास भी नहीं फटकते बल्कि उसे देखकर भाग जाते हैं।

एक दिन वह शिकारी एक जंगल से गुजर रहा था। वहाँ पर एक लकड़हारा लकड़ी काटने में व्यस्त था। वह शेखी बघारने वाला शिकारी उसके पास गया और बोला, “दोस्त। तुमने यदि किसी शेर के पैरों के चिन्ह देखे हों तो मुझे बताओ। मुझे शिकार किए हुए कई महीने हो गए।”

लकड़हारा उस शिकारी की शेखी बघारने की आदत से भली-भाँति परिचित था। इसलिए वह बोला, “हाँ, यहाँ पास की ही एक गुफा में शेर है। क्या मैं, तुम्हें वहाँ लेकर जाऊं?” उसकी बात सुनकर शिकारी डर गया और बोला, है कि नहीं नहीं! मैं तो सिर्फ उसके पैरों निशान के देखना चाहता था।”

यह कहकर वह वहाँ से भाग खड़ा हुआ। इसीलिए कहा गया है कि कभीकभी बड़बोलापन भारी भी पड़ जाता है।

 

Panchtantra Ki Kahani – आलसी रिक्कू

रिक्कू एक आलसी खरगोश था। वह मेहनत नहीं था वह करना चाहता । धीरे-धीरे कुलांचे भरते हुए चलता। अपने आलस और ढीलेपन के कारण वह हर जगह देर से पहुँचता। रोज सुबह उसके माता-पिता उसे जगाते हुए कहते, ‘‘बेटा, जल्दी बिस्तर छोड़ो। आलस करना एक बुरी आदत है।

इस वजह से तुम्हें हानि उठानी पड़ सकती है।” लेकिन रिक्कू उनकी सलाह पर कभी ध्यान नहीं देता था। एक दिन रिक्कू एक छायादार वृक्ष के नीचे लेटा हुआ था। पास में ही कुछ खरगोश खेल रहे थे। टिक्कू नाम का खरगोश दौड़ता हुआ उसके पास आया और बोला, ‘‘दोस्तो, यहाँ से भागो।

एक लोमड़ी इधर ही आ रही है। वह हम सबको खा जाएगी।” यह सुनकर सभी खरगोश वहाँ से भाग गए। लेकिनरिक्कू अपने आलस के कारण नहीं उठा। उसने सोचा, ‘अभी तो लोमड़ी यहाँ से बहुत दूर है। मैं थोड़ी देर और सुस्ता ढूं। लोमड़ी के आने से पहले ही मैं भाग जाऊगा। जल्दी ही लोमड़ी वहाँ पहुँच गई। और रिक्कू भाग नहीं पाया।

लोमड़ी ने उस पर झपट्टा दे के उसे मार दिया। इस कि प्रकार अपने आलस के कारण रिक्कू को अपनी जान से हाथ धोना पडा।

Panchtantra Ki Kahani – बुद्धिमान नाई

एक बार एक नाई जंगल से होकर गुजर रहा था। जंगल में जंगली जानवरों का बड़ा भय था। उसे बहुत डर लग रहा था। जब एक हिंसक शेर उसके सामने आकर खड़ा हो गया तब उसका डर सच साबित हो गया लेकिन नाई ने साहस नहीं छोड़ा।

वह हिम्मत बटोरकर शेर के गया और बोला। पास “ओहो तो तुम यहाँ पर हो। मैं तुम्हें बहुत समय से ढूंढर हा हूं । शेर उसकी बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गया। उसने नाई से पूछा लेकिन तुम मुझे क्यों ढूंढ रहे हो? नाई ने जवाब दिया,‘‘राजा ने मुझे दो शेर पकड़ने को कहा था। एक शेर को तो मैं पहले ही पकड़ चुका हूं और दूसरे तुम हो।”

यह कहकर नाई ने अपने थैले से दर्पण निकालकर शेर को दिखाया। शेर ने जैसे ही दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब देखा तो उसे देखकर उसे यही लगा कि इस व्यक्ति ने दर्पण में एक शेर को कैद कर रखा है। यह देखकर शेर अपनी जान बचाने के लिए वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

बुद्धिमान नाई अपने रास्ते चल दिया। उसकी बुद्धिमानी, युक्ति और धैर्य के कारण उसकी जान बच गई थी।

Panchtantra Ki Kahani – एक अच्छा नेता

जंगल में चुनाव था, जिसके लिए सभी जानवर एकत्र हुए थे। चुनाव के बाद मतगणना आरम्भ हो गई। सभी चुनाव का परिणाम जानने को उत्सुक थे। मतगणना का कार्य पूरा हुआ। सियार को जंगल का नया राजा घोषित किया गया।

उसकी प्रतिद्वंद्वी लोमड़ी चुनाव हार गई थी। अब लोमड़ी ने उससे बदला लेने की तरकीब सोची। योजना के मुताबिक उसने एक जगह जाल बिछाया और उसमें कुछ माँस भी रख दिया। फिर वह सियार के पास जाकर बोली, ‘‘महाराज, एक पेड़ के नीचे अनछुआ माँस पड़ा हुआ है।

आप वहाँ जाएँ और उसे अपना भोजन बनाएँ। सियार वहाँ गया। माँस खाना शुरू करते ही वह जाल में फंस गया। तब लोमडी ने यह बात सभी जानवरों को बताई और उन्हें बुला लाई। उसने सियार को दिखाते हुए कहा’एक अच्छे नेता का अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण होना चाहिए और उसे कभी भी बिना सोचविचार के दूसरों की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

परंतु सियार में ये दोनों ही गुण नहीं हैं, इसालए यह कभी भी एक अच्छा नेता नहीं बन सकता।”

Panchtantra Ki Kahani – अपनी-अपनी विशेषता 

एक बार जंगल के राजा शेर ने जानवरों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया |चीते को उसके तेज दौड़ने की क्षमता के कारण सेनानायक का पद दिया गया | बुद्धिमान हाथी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।

इस तरह से सभी जानवरों को उनके अनुकूल कोई न कोई पद अवश्य दिया गया। बस खरगोश, कछुए और गधे को ही कोई पद नहीं दिया गया। यह देखकर घोड़ा बोला, “खरगोश तो आसानी से डर जाता है।”

जिराफ बोला,‘कछुआ तो एक कदम चलने में ही घंटों लगा देता है। ऊंट बोला,”गधा तो बेवकूफ होता है। सभी एक स्वर में बोले, “ये तीनों किसी कार्य के लायक नहीं हैं, इसलिए इन्हें कोई पद नहीं मिला” इस पर शेर बोला, ‘नहीं ऐसा नहीं है। प्रत्येक की अपनी एक अलग विशेषता होती है।

खरगोश तेज दौड़ने की क्षमता के कारण हमारा संदेशवाहक होगा। कछुआ आसानी से छुप जाने में सक्षम होने के कारणहमारा जासूस होगा। गधा विपरीत परिस्थिति में अपनी ऊंची आवाज से आगाह करने का कार्य करेगा। इस प्रकार सभी जानवरों को यह सबक मिला कि प्रत्येक की अपनी एक अलग विशेषता होती है। इसलिए किसी की खिल्लीनहीं उड़ानी चाहिए |

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 धन्यवाद ! हमारी कामना है आपका हर दिन मगलमय हो |

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