My Village Essay In Hindi – मेरा गाँव का हिंदी निबध 👯‍♂️🕺

My Village Essay In Hindi

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हूँ  My Village Essay In Hindi |  हमारा ये लेख बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्दक है |  इन प्रस्ताव से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है My Village Essay In Hindi . हमारे ये प्रस्ताव आपके स्कूल के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है |

My Village Essay In Hindi

मेरा गाँव – My Village Essay In Hindi 🖼

भारत में बड़े नगर तो सौ के लगभग ही हैं और कस्बे कुछ हजार ही हैं, किंतु इसकी आबादी का अस्सी प्रतिशत भाग गाँवों में ही बसा हुआ है, जिनकी संख्या लगभग दस लाख है।

नगर के ठाटबाट और कोलाहल से दूरशांति और सादगी का जीवन बितानेवाले लोगों के कुछ घरों का समूह ही गाँव है। गाँवों में अधिकांश मकान कच्चे होते हैं। ये लकड़ी, सरकंडे, बाँसखपरैल आदि से बने होते हैं। कहीं एक-दो ही घर उन लोगों के पक्के होते हैं, जिनकी स्थिति कुछ अच्छी कही जा सकती है।ये घर प्राय: किसी धनाढय जमींदार, सैनिक अधिकारी सेठ या पटवारी आदि के होते हैं।

गाँवों के चारों तरफ खेतों का दृश्य अत्यंत रमणीक होता है। गाँवों का वातावरण : प्राय स्वास्थ्यप्रद है। शुद्ध उन्मुक्त , खुली , मनोहर प्रभात तथा शोभन सायंकाल-ये सब पवन ग्राम्य जीवन को आनंदमय बनाते हैं। प्रकृति की अपूर्व छटा गाँवों में ही देखने को मिलती है। धान या गेहूं के खेतफूली सरसों के खेत, ऊँचे ऊँचे गन्नों के खेत आदि देखकर चित्तआह्वादित हो जाता है।

गाँव वासी स्वस्थ, सबल, सीधे-सादे, अशिक्षित या अल्पशिक्षित कठोर परिश्रमी तथा प्राय: हंसमुख होते हैं। गाँवों के निवासी अधिकांश किसान होते हैं। कुछ लोग दूसरों के खेतों पर भी काम करते हैं, जो कृषि-मजदूर कहलाते हैं। इनके अतिरिक्त गाँवों में कुछ बढ़ई ,लोहार, मोची, दुकानदार, चौकीदार, अध्यापक तथा पंचायत के कर्मचारी होते हैं । गाँवों कुछ ऐसे रूढ़िवादी लोग भी होते हैं, जो आधुनिक सभ्यता की अनेक बातों का विरोध और उसकी आलोचना करते हैं।

My Village Essay In Hindi – गाँवों का व्यवसाय

गाँवों में पशुपालन भी एक मुख्य व्यवसाय है। गाय, भैंस और बैल तो दूध तथा कृषि के लिए पाले ही जाते हैं, इनके साथ-साथ घोड़े, गधे, खच्चर, ऊँट और सूअर भी पाले जाते हैं। मुरगे-मुरगिंयों,बत्तखें, तोते, कबूतर और मोर भी पाले जाते हैं।

गाँव वाले भय के वातावरण से कभी मुक्त नहीं होते। अशिक्षित ग्रामीणों को तो हर कोई दबाता है। दूसरे गाँवों के पशु आकर खेतों को खराब न कर , इसका भय उन्हें सदा सताता रहता है पुलिस, पटवारी, बी.डी.ओ. आदि धौंस जमाने के अलावा सीधे-सादे गाँव वालों से उनकी उपज की वस्तुएँ प्राय: मुफ्त ही प्राप्त करते रहते हैं।

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गाँव वाले छोटी-छोटी बातों पर परस्पर लड़ते भी देखे जाते हैं। नहर के पानी की बारी,खेत की मेड़ आदि के सवाल पर लाठी तथा गोली तक चल जाती हैं। छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े चल पड़ते हैं, मारपीट होती है और कचहरियों में मुकदमे की नौबत आ जाती है।

गाँवों में सफाई की ओर प्राय: ध्यान नहीं दिया जाता। सड़कें प्राय: कच्ची होती हैं, जिनमें गड्ढे होते हैं । वर्षा में ये गड्ढे भर जाते हैं और इनमें मलेरिया आदि के मच्छर बहुतायत से पैदा होते हैं  गाँववाले दवा-दारू की ओर प्राय: तभी ध्यान देते हैं, जब रोग बढ़ जाए। स्वतंत्रता के बाद सरकार तथा कुछ समाजसेवी संस्थाओं की ओर से ग्राम-सुधार का आंदोलन चलाया गया |जिसके परिणामस्वरूप गाँव वालों को विभिन्न प्रकार की खादों का प्रयोग करना आ आा गया।

 गाँवों में सुधार – My Village Essay In Hindi 🎀

उन्होंने खेती की नई विधियाँ सीखीं। कुछ लोग पशुपालन मुरगीपालन मछलीपालन का धंधा करने लगे और सफाईशिक्षा आदि में भी उनकी रुचि बढ़ी। प्राय गाँव में स्कूल खुलने लगे । चौपालों में समाचार-पत्र आने लगे। कहीं-कहीं रेडियो और ट्रांजिस्टर की व्यवस्था की गई। बिजली आने से कई गाँवों की कायापलट हो गई।अब कई जगह ट्रैक्टरों से खेती होने लगी है।

निष्कर्ष – My Village Essay In Hindi 🧗‍♂️

सरकार द्वारा अच्छे दामों पर अनाज की खरीद से गाँववालों को काफी आर्थिक लाभ हुआ है। फिर भी अभी सरकार को बहुत कुछ करना है। तभी हमारे गाँवों का सुधार हो सकेगा।

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