Moral Stories In Hindi – बच्चों के लिए नैतिक कहानियाँ हिंदी में 👯‍♂️🐓

Moral Stories In Hindi

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हू Moral Stories In Hindi |  ये कहानियाँ बहुत रोचक और मज़ेदार है | इन कहानियो से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi

कंजूस व्यक्ति – Moral Stories In Hindi 🤩

एक दिन एक कंजूस व्यक्ति के दोस्त ने अपने मित्र की कंजूसी की आदत छुड़ाने की सोची। वह उसे बाजार ले गया और बोला,”प्रिय मित्र, तुम क्या खाना पसंद करोगे?” कंजूस बोला, भूख लगी है, चलो भोजन किया जाए।”

वे एक होटल में जाकर कंजूस के दोस्त ने होटल मालिक से पूछा” भोजन कैसा है?” होटल मालिक ने कहा,‘‘मिठाई की तरह स्वादिष्ट हैं |” कंजूस का दोस्त बोला, ‘‘क्यों न भोजन के स्थान पर कुछ मीठा खाया जाए।

फिर वे एक शहद बेचने वाले की दुकान पर गए और पूछा, “शहद कैसा है?” शहद बेचने वाला बोला, ‘एकदम शुद्ध बिल्कुल पानी की तरह।कंजूस का दोस्त बोला,‘‘अरे फिर यूं ही पैसे क्यों व्यर्थ करें। चलो, घर चलते हैं। मैं तुम्हें घर पर शुद्ध शहद के रूप में पानी ढूंगा”

फिर घर पहुँचकर कंजूस के दोस्त ने उसे पानी से भरा एक बर्तन थमा दिया। कंजूस समझ गया कि उसके दोस्त ने उसे सबक सिखाने के लिए ही ऐसा किया है।इसलिए उसने उस दिन से कंजूसी छोड़ दी|

आस्था – Moral Stories In Hindi 🙏

धर्मदास एक मेहनती एवं ईश्वर में आस्था रखने वाला व्यक्ति था। अपनी सफलता के लिए वह हमेशा ईश्वर को धन्यवाद दिया करता था। धीरे-धीरे कठिन परिश्रम कर वह एक सफल व्यवसायी बन गया। लेकिन अब उसे अपने ऊपर घमंड हो गया। वह सोचता कि वह सिर्फ अपने कठिन परिश्रम से ही सफल हुआ है, इसमें भगवान का कोई हाथ नहीं है।

इसलिए उसकी भगवान में आस्था कम हो गई और उसने भगवान की पूजा करनी छोड़ दी। एक बार लोगों के बीच भगवान को लेकर बहस होने लगी तो धर्मदास बोला,‘‘ भगवान कौन है? वह है ही नहीं देखो मैं अपने कठिन परिश्रम के कारण ही आज सफल हुआ हूँ। और यदि वास्तव में भगवान शक्तिशाली है, तो वह मुझे दो मिनट में मारकर दिखाए।

मैं उसे चुनौती देता हूं। ” दो मिनट बाद धर्मदास स्वयं को जिंदा पाकर भगवान के ऊपर हँसने लगा।
तब एक बूढ़ा बोला,”यदि तुम्हारा बेटा तुमसे एसा करने का कहता तो क्या ।  तुम उसे मार डालते? भगवान हमारे पिता के समान हैं। वह कभी तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकते | तुम्हारी सफलता में भगवान का ही आशीर्वाद है। ”

धर्मदास को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने घमंड करना छोड़ दिया। और वह एक बार फिर ईश्वर में विश्वास करने लगा।

घमंडी पेड़ -Moral Stories In Hindi 🌴

सड़क के किनारे एक बरगद और एक आम का पेड़ था। आम के पेड़ पर पीले एवं मीठे आम लगते लोग उसकी विश्राम के थे। सभी छाँव में करने साथ-साथ उसके मीठे फलों का भी आनंद लेते थे। बूढ़े बरगद की तरफ कोई भी ध्यान नहीं देता था।

धीरे-धीरे उस आम के पेड़ को अपने ऊपर बडा घमंड हो गया। वह बरगद के पेड़ से बोला,‘‘प्रत्येक व्यक्ति मुझे व मेरे स्वादिष्ट फलों को ही पसंद करता है, तुम्हें तो कोई पूछता भी नहीं।” बरगद का पेड़ बोला,‘‘इतना घमंड अच्छा नहीं, प्रत्येक वस्तु का अपना एक विशेष महत्व और उपयोग होता है।’

इसके अगले ही दिन कुछ बच्चों ने उस घमंड़ी पेड़ के सारे आम तोड़ डाले और टहनियों एवं पत्तों को भी नुकसान पहुँचाया। अब आम का पेड़ बड़ा ही भद्दा लग रहा था। आम के पेड़ की ऐसी स्थिति देखकर बरगद का पेड़ बोला, ‘‘घमंड हमेशा मुसीबत में डालता है। तुम्हारी खूबसूरती ही तुम्हारे लिए मुसीबत बन गई जबकि मैं अब भी यहाँ पर वैसे ही सुरक्षित खड़ा हूं।’

Moral Stories In Hindi – पहेली 🦆

एक बार एक राजा किसी बुद्धिमान व्यक्ति को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त करना चाहता था। इसलिए उसने एक योजना बनाई और पूरे राज्य में घोषणा करवा दी कि जो भी एक पहेली का जवाब देगा, वह उसे ही अपना प्रधानमंत्री नियुक्त करेगा।

पहेली इस प्रकार थी- एक आदमी के पास एक शेर, एक बकरी और घास का एक पुलिंदा है। वह व्यक्ति तीनों को किस प्रकार नदी पार ले जाए ताकि शेर बकरी को व बकरी घास को न खा सके। जबकि नाव में एक वक्त में सिर्फ दो ही लोग जा सकते हैं। वह आदमी क्या करेगा?

बहुत से लोगों ने इस पहेली को हल करने की कोशिश की, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। तब एक युवक राजा के पास आया और बोला, ‘महाराज पहेली के लिए मेरा हल इस प्रकार है, वह व्यक्ति पहले बकरी को नदी के पार लेकर जाएगा। फिर वह शेर को नदी पार लेकर जाएगा वह बकरी को अपने साथ वापस  ले जाएगा। तब घास को लेकर जाएगा। और फिर बकरी को लेकर जाएगा। इस प्रकार तीनों नदी पार हो जाएंगे।”

राजा उसकी चतुराई एवं बुद्धिमानी से अत्यधिक प्रसन्न एवं प्रभावित हुआ। और उसे अपना प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया।

चतुर राजा -Moral Stories In Hindi 👨‍🎨

राजा कालहेतु एक क्रूर एवं लालची राजा था। उसने सभी पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण कर पराजित कर दिया था। लेकिन सिर्फ राजा उदयमान को उन्हें पराजित करने में वह असफल रहा था। उदयमान को बंदी बनाने के लिए राजा कालहेतु ने एक चाल चली उसने उदयमान को अपने महल में भोज पर आमंत्रित किया।

राजा उदयमान ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। जब राजा उदयमान राजा कालहेतु के
महल पहुँचा तो उसे बंदी बना लिया गया। अब राजा कालहेतु अपने एकमात्र दुश्मन को बंदी बनाकर बहुत खुश था। उसे अपने ऊपर अत्यधिक गर्व महसूस हो रहा था। वह यह सोच-सोचकर फूला नहीं समा रहा था कि भले मैंने छल का सहारा लिया है, लेकिन अब मेरा कोई शत्रु नहीं रहा।

अब उसे किसी का भय नहीं रहा था। तभी अचानक एक सिपाही दौड़ता  उसके पास आया और
बोला, ‘‘महाराज राजा उदयमान ने हमारे राज्य परआक्रमण कर दिया है और उसकी सेना ने हमें चारों तरफ से घेर लिया है। जिस व्यक्ति को आपने बंदी बनाया है, वह राजा उदयमान नहीं है, बल्कि
एक बहरूपिया है।

उदयमान की इस युद्ध में विजय हुई। फिर उसने कालहेतु से दूसरे राज्यों के राजाओं को आजाद करने के लिए कहा।

Moral Stories In Hindi – जैसे को तैसा 🐶

एक आम विक्रेता घूम-घूमकर आम बेच रहा था। कुछ देर बाद वह एक पान की दुकान के पास पान खाने के लिए रुका। उधर पान बेचने वाले ने आम देखें तो वह आम बेचने वाले से चिल्लाकर बोला, आम वाले! अगर तुम्हें बुरा न लगे तो पान के बदले आम दोगे?”

आम विक्रेता खुशी-खुशी तैयार हो गया। लेकिन पान बेचने वाला उसे धोखा देना चाहता था। उसने एक छोटा-सा पान का पत्ता लिया और एक छोटा पान बनाकर आम विक्रेता को दे दिया। आम विक्रेता ने उससे चूना डालने को कहा। लेकिन पान वाला बोला, जाओ और पान को दीवार से रगड़ो। चूना अपने आप मिल जाएगा।”

आम विक्रेता समझ गया कि पान वाला उसे धोखा दे रहा है। इसलिए उसने पान वाले को हरा आम दिया। हरा आम देखकर पान वाला बोला, मुझे पीला पका हुआ आम दो।” उसकी बात सुनकर आम विक्रेता हंसते हुए बोला, “जाओ और पीले रंग से पुती हुई दीवार से आम को रगड़ो तो वह पीला हो जाएगा।’

इस प्रकार आम विक्रेता ने पान वाले के साथ वैसा ही व्यवहार किया, जैसा कि उसने किया था। इस ही कहा जाता है- ‘जैसे को तैसा’।

अन्य लेख

खुजली – Moral Stories In Hindi 🐉

एक दिन एक राजा ने एक भिखारी को महल के दरवाजे सामने अपनी पीठ रगडते हुए देखा। उसने अपने सिपाहियों से भिखारी को पकड़कर के राजदरबार में ले आने को कहा। सिपाही फौरन गए और भिखारी को पकड़कर ले आए। राजा ने उससे पूछा, ‘”तुम महल के दरवाजे के सामने अपनी पीठ क्यों खुजला रहे थे?’

भिखारी बोला,‘‘महाराज मेरी पीठ में खुजली हो रही थी, इसलिए मैं महल के दरवाजे के सामने पीठ खुजला रहा था।’ ” राजा ने यह सुनने के बाद अपने सिपाहियों को आदेश दिया, ‘”इस भिखारी को
बीस स्वर्ण मुद्राएँ दी जाएँ |”

जल्दी ही यह खबर पूरे राज्य में आग की तरह फैल गई। कुछ समय बाद राजा ने दो अन्य है। भिखारियों को महल के सामने अपनी पीठ रगड़ते देखा। उन्हें भी बुलवाकर राजा ने उनसे पीठ खुजाने का कारण पूछा। उन्होंने भी जवाब दिया कि उनकी पीठ में खुजली हो रही थी। यह सुनकर राजा ने अपने सिपाहियों से कहा‘इन भिखारियों की पीठ की खुजली ठीक करने के इनकी पीठ पर बीस-बीस कोड़े लगाओ।’’

यह सुनकर दोनों तुरंत बोले, “लेकिन महाराज आपने तो एक अन्य भिखारी को बीस स्वर्ण मुद्राएँ दी थीं।” राजा बोला, “उसने सच कहा था, लेकिन तुम दोनों झूठ बोल रहे हो। यदि चाहते तो तुम दोनों एक दूसरे की पीठ खुजला सकते थे। तुम दोनों यहाँ सिर्फ लालच के कारण ही आए हो।” दोनों भिखारी अपनी करनी पर शर्मिदा थे।

आलसी चिड़िया – Moral Stories In Hindi 🐦

चिक्की, मिक्की नाम की दो चिड़ियाँ एक घोंसले में रहती थीं। दोनों बहुत आलसी थीं। सर्दी का मौसम था। चारों तरफ ठंडी हवा चल रही थी। बर्फवारी भी हो रही थी। संयोग से उनके घोंसले में एक छेद हो गया। छेद से ठंडी हवा आने के कारण उनका घोंसला एकदम ठंडा हो जाता था।

चिक्की और मिक्की दोनों को भारी ठंड लगती। चिक्की ने सोचा, ‘मुझे आश्चर्य है कि मिक्की इस छेद को क्यों ठीक नहीं करवाती है।’ वहीं दूसरी तरफ मिक्की ने सोचा, ‘चिक्की बड़ी आलसी है। वह क्यों नहीं
इस छेद को ठीक करवाती?’

इस तरह दोनों ही एक-दूसरे से उस छेद को बंद करवाने की उम्मीद लगाए बैठी थीं। फलस्वरूप उनके घोंसले का छेद वैसे ही बना रहा। धीरे-धीरे बर्फवारी तेज हो गई और हवा भी तेज चलने लगी। अब छेद के रास्ते बर्फ उनके घोंसले में प्रवेश कर गई।

अब आलसी चिड़ियाँ ठंड से काँपने लगीं, लेकिन किसी ने भी छेद को बंद करने की कोशिश नहीं की अंतत: दोनों ठड से मर गई। इस प्रकार, अपने आलसी स्वभाव के कारण दोनों चिड़ियाँ अकाल मौत का शिकार बनीं।

दायित्व का गवाह – Moral Stories In Hindi 🛠

सभी विद्यार्थी पिकनिक पर जाने के लिए उत्सुक थे। अध्यापिका ने अर्जुन को मॉनिटर बनाते हुए कहा, ‘अर्जुन, सभी विद्यार्थियों की गतिविधियों पर निगाह रखना। कोई भी विद्यार्थी बस की खिड़की से अपना हाथ या सिर बाहर न निकाले और हाँ, पिकनिक से लौटने से पहले विद्यार्थियों की संख्या अवश्य गिन लेना।’

अर्जुन बोला, ‘जी मैडम आपने जैसा कहा है, मैं वैसा ही करूंगा। और आपको शिकायत का कोई मौका
नहीं ढूंगा।” सभी बच्चे पिकनिक पर गए। उन्होंने पिकनिक में खूब मजे किए |फिर सब लोग घर वापस आने के लिए बस में बैठ गए | तभी अध्यापिका ने देखा अर्जुन अपना सिर बस से निकालकर बाहर झाँक रहा है।

अध्यापिका को बड़ा गुस्सा आया और वह उसे डाँटते हुए बोलीं, ‘अर्जुन तुम दायित्व उठाने के लायक नहीं हो, मैंने तुम्हें जिम्मेदारी देकर मॉनिटर बनाया और तुमने नियमों को स्वयं ही तोड़ दिया। तुम्हें शर्म
आनी चाहिए।”

अर्जुन अपना सिर झुकाकर बोला, ‘मैडम मुझे माफ कर दीजिए। लेकिन मैं तो आपके ही आदेश का पालन कर रहा था। में यह देख रहा था कि कहीं कोई विद्यार्थी पीछे तो नहीं छूट गया।”

अध्यापिका उसकी बात सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हुई और समझ गई कि अर्जुन एक अच्छा एवं जिम्मेदार मॉनिटर है।

प्रकृति का नियम – Moral Stories In Hindi 🍑🐍

एक कुम्हार था। वह बहुत ही खूबसूरत बर्तन बनाता था। उसका बर्तनों का व्यवसाय बड़ा अच्छा चल रहा था। लेकिन कभी-कभी लोग बर्तनों केआसानी से टूटने की शिकायत करते थे।

इसलिए उसने देवी माँ से प्रार्थना करते हुए कहा‘‘हे देवी! कृपा करके मेरे बर्तनों को न टूटने वाला बना दीजिए | मैं ग्राहकों की शिकायत सुनते-सुनते परेशान हो चुका हूँ।’ देवी माँ प्रकट होकर उसे आशीर्वाद देते हुए बोलीं,‘पुत्र, जैसी तुम्हारी इच्छा।” और इतना कहकर वे अंतर्धान हो गईं। अब कुम्हार के सभी बर्तन न टूटने वाले हो गए|

अब कोई भी ग्राहक उसके पास शिकायत लेकर नहीं आता था। लेकिन ग्राहकों ने अब कुम्हार से बर्तन खरीदने कम कर दिए थे, क्योंकि उनके पुराने बर्तन टूटते ही नहीं थे। अब वह कुम्हार एक बार फिर देवी से प्रार्थना करते हुए बोला ‘हे देवीकृपा करके मेरे बर्तन पहले जैसे ही बना दीजिए |

अब मैं कभी प्रकृति के विरुद्ध नहीं जाऊंगा।” देवी ने उसकी इच्छा पूर्ण कर दी। अब एक बार फिर कुम्हार का व्यवसाय खूब फलने-फूलने लगा।

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