Letters In Hindi – हिंदी में सीखे पत्र लिखना नमूने के साथ 📃✉

letters in hindi

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हू Letters In Hindi |  ये पत्र बहुत ज्ञानवर्दक है | इन पत्रों से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है Letters In Hindi

Letters In Hindi – पत्र-लेखन की ऐतिहासिकता  ✉

मनुष्य जब से लिखने पढ़ने लगा तभी से अपने विचारों के आदान प्रदान का माध्यम ‘पत्र’ को बनाया गया। प्रारंभिक दौर में वैचारिक आदान-प्रदान का एकमात्र माध्यम पत्र हुआ करता था। प्रेमिका और
प्रेमियों के बीच परस्पर संवाद का जरिया पत्र था तो दो देशों या देशी राजाओं के बीच संवाद का माध्यम पत्र ही था।

पत्र भेजने की सुनिश्चित व्यवस्था डाक विभाग की स्थापना के बाद ही संभव हो सकी है। डाक विभाग ने जब से काम करना शुरू कर दिया, तब से संवाद यानी संदेश प्रेषित करने में कठिनाइयाँ कम
हो गईं ।

डाक-व्यवस्था के जन्म से पूर्व पत्र प्रेषित करने का जरिया या तो घुड़सवार सिपाही थे या आकाश मार्ग से पत्र पहुँचाने वाला दूत कबूतर’था। पक्षियों में कबूतर इस मायने में गजब का पक्षी है। संदेश पहुँचाने की विश्वसनीयता पर कबूतर ने कभी आंच नहीं आने दी।
मानव के रूप में जो दूत पत्र लेकर जाते रहे थे उनके महत्व का क्या कहना है। दूत भी दो प्रकार का कार्य करते थे। एक प्रकार के दूत मौखिक संदेश पहुँचाते थे तो दूसरे प्रकार के दूत लिखित संदेश पहुँचाते थे। निश्चित रूप से लिखित संदेश पहुँचानेवाले दूत अधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते थे। प्राचीनकाल और मध्यकाल में दूत द्वारा पास प्रथम संदेश-प्रेषण का कार्य काफी प्रचलित था। दूसरे पक्ष के पक्ष संदेश लेकर जाता था और प्रथम पक्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति उसे ग्रहण करता था। वह दूत प्रथम पक्ष और द्वितीय पक्ष की समवेत आवश्यकता व अनिवार्यता के केंद्र में होता था। उदय-अस्त
उत्थान-पतनसामंजस्य-असामंजस्यद्विपक्षीय संभावित संघर्ष द्विपक्षीय संभावित ऐक्य आदि के केंद्र में एकमात्र दूत होता था।

 

समय करवट लेने लगा। विज्ञान की प्रगति होती गई। साधन बढ़ते गए। कम-से-कम समय में अधिक-से-अधिक दूरी तय की जाने लगी। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि पुराने हथकंडे व्यर्थ
प्रतीत होने लगे। संपर्क स्थापित करने के आधुनिकतम साधन उपलब्ध होने से अब लिखने की या लिखवाने की जहमत झेलने की पत्र स्थिति नहीं रही। यद्यपि अनपढ़अल्पशिक्षित लोगों के लिए आज भी
समस्या बनी हुई है और पत्र का मुहताज होना पड़ रहा है तथापि अब तो ‘इ-मेल’ के जरिए बशर्ते कि पत्र तैयार होना चाहिए) पहुँचाने की समस्या छू-मंतर हो गई है। ‘इ-मेल’ से पूर्व और पत्र के मध्य
‘तार’ (Telegramकी व्यवस्था से भी आम आदमी को काफी राहत मिली थी।

माना कि आधुटिक इलेक्ट्रॉनिक साधनों ने दुनिया को छोटी बना दिया है और समय को काफी महत्त्वपूर्ण बना दिया है, लेकिन पत्र लिखना अब भी कम नहीं हुआ है।

कुछ क्षेत्र में भले ही पत्र लिखने में कमी आई है, जिसकी भरपाई मोबाइल फोन से हो जाती है, लेकिन सरकारी महकमों में पत्र लिखने का सिलसिला निरंतर चलता रहा है और चलता रहेगा। यह तो मानना ही है कि पिछले हजार वर्षों से पत्र की मर्यादा अक्षुण्ण रही है। डाक विभाग जब से सरकारी विभाग के रूप में कार्यरत हुआ, पत्रों की बाढ़ सी आ गई। यह नजारा तब देखने को मिलेगा जब आप आज की तारीख में किसी रेलवे स्टेशन पर, जो बड़ा जंक्शन है, डाक विभाग की सेवा से रू-ब-रू होंगे। एक आश्चर्य होता है कि आखिर इतने लोग पत्र लिखते हैं।

मेरा अनुमान यह है कि पत्र ही एक ऐसा माध्यम है जिससे लोग अपने मन की बातों से संबद्ध व्यक्ति को अवगत करा सकते हैं। आजकल पत्र पाने और भेजने की प्रक्रिया को पत्राचार’ कहा जाता साहित्य-क्षेत्र में साहित्यकारों के बीच के पत्राचार या महान् व्यक्तियों से पत्राचार को एक अलग विधा के रूप में स्वीकार किया जा चुका है।

आजकल तो अनिवार्य रूप से पाठ्य-पुस्तकों में भी एकाध ‘पत्र’ दिए जाने लगे हैं। पत्र छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी। पत्र दो-चारदस पंक्तियों में भी लिखा जा सकता है और कई पृष्ठों का भी हो सकता है। साहित्यकारों द्वारा लिखा गया पत्र बेशक एक उत्कृष्ट साहित्यिक रचना होगा और एक सिद्धहस्त राजनेता का पत्र बेशक दार्शनिक तथ्यों पर आधारित और जीवनोपयोगी होता है।
अस्तुपत्र की महत्ता सदा-सर्वदा अक्षुण्ण रहेगी, यह संभावना दिखाई पड़ती है। यही कारण है कि पत्राचार अथवा पत्रलेखन पर किसी उत्कृष्ट पुस्तक की आकांक्षा आम पाठक को भी होती है।

Letters In Hindi – व्यावसायिक पत्र  📢

किसी भी व्यवसाय से संबंधित व्यक्ति को पत्र लिखना व्यावसायिक पत्र के अंतर्गत आता है।

व्यावसायिक पत्र लिखने की शैली

व्यावसायिक, व्यापारिक या संस्थागत पत्र लिखने की शैली इस प्रकार है

1. भेजनेवाले का नाम व पता
2. दिनांक
3. पत्र पानेवाले का पद, नाम व पता
4. संबोधन
5. विषय का उल्लेख
6. धन्यवाद
7. स्वनिर्देश।

    खाता खोलने के लिए बैंक मैनेजर के नाम पत्र – Letter In Hindi  🐦

सेवा में,
प्रबधक
पंजाब नेशनल बैंक,
ट्रैफिक चौक, बेगूसराय
(बिहार)

विषय : बैंक में नया खाता खोलना।

महोदय,

विनम्र निवेदन है कि मैं उक्त बैंक में अपने नाम से एक बचत खाता खोलना चाहता हूँ।

कृपया अनुमति प्रदान करते हुए विषय में उचित जानकारी देने का कष्ट करें।
सधन्यवाद

भवदीय/विश्वासी
क ख ग
पता

🏅 शिकायती पत्र के नमूने और लेखन कला  – Letters In Hindi 

शिकायती पत्र लिखने की शैली

इन पत्रों में निम्नलिखित अंग होते हैं
1. शिकायत सुननेवाले अधिकारी का नाम
2. संबोधन
3. मुख्य बात (शिकायत)
4. धन्यवाद
5. स्वनिर्देश।

पत्र का प्रारूप

दिनांक

स्वास्थ्य अधिकारी
पश्चिमी क्षेत्र
नगर निगम, दिल्ली।

विषय : गंदगी की समस्या।

महोदय,

निवेदन है कि दिल्ली के पश्चिम विहार में विगत कई दिनों से कूड़े का निपटान न होने के कारण स्थानीय लोगों का बदबू के मारे बुरा हाल है। स्थानीय कार्यालय में इस समस्या के निदान हेतु कई बार
संपर्क किया गयापरंतु अब तक कोई कारवाई नहीं हुई।

अत: आपसे अनुरोध है कि शीघ्रातिशीघ्र समस्या को निबटाने का कष्ट करें।

धन्यवाद सहित।

भवदीय

आवेदक के हस्ताक्षर

दिनांक….
पता

स्वास्थ्य अधिकारी से बाजार की सफाई के लिए पत्र

श्रीमान स्वास्थ्य अधिकारी महोदय
नगर निगमबेगूसराय

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हीरालाल चौक बाजार में दिन-प्रतिदिन गंदगी बढ़ती जा रही है। जूठे पत्तेगोबर और कूड़ाकरकट जगह जगह पड़ा रहता है। नालियों में पन्नियाँ पड़ी रहती हैं, जिससे गंदा
पानी जमा रहता है। सफाई कर्मचारियों से कई बार कहा जा चुका है, लेकिन उनके कान पर यूं तक नही रेंगती हैं।

अत: आपसे प्रार्थना करता हूँ कि शीघ्र ही इस क्षेत्र के सफाई कर्मचारियों को आदेश देकर गंदगी साफ करने का प्रबंध किया जाए।

धन्यवाद।
5.5.2013
प्रार्थी
हीरालाल चौक के नागरिक

अन्य लेख

संपादक के नाम पत्र – Letters In Hindi 👏

संपादक के नाम पत्र में निम्नलिखित अंग होते हैं

1. संपादक, पत्र तथा उसके कार्यालय का नाम
2. संबोधन
3. पत्र में छापने का अनुरोध
4. विषय
5. धन्यवाद
6. स्वनिर्देश
7. दिनांक।

प्रारूप का उदाहरण।

सेवा में,
क ख ग पत्र
नगर

महोदय
मैं आपके लोकप्रिय हिंदी दैनिक में पाठकों के पत्र’ स्तंभ में आजकल प्रदूषण |

सधन्यवाद!
क ख ग
पता
दिनांक

आधुनिक वैज्ञानिक युग में पत्रलेखन की अनिवार्यता – Letters In Hindi 🌺

पत्र के माध्यम हम की बातों व्यक्त हैं तो से मन को जब करते संतुष्ट होते हैं, इसका कारण यह है कि हमारे मन में एक धारणा यह बनती है कि पत्र में गुप्त रूप से हम संबंधित व्यक्ति को सबकुछ कह डालते हैं। पत्र में एकमात्र पोस्टकार्ड खुला होता है। आजकल पोस्टकार्ड का उपयोग निहायत कम हो गया है, इसका सबसे बड़ा कारण खुलापन ही है। लोग गोपनीयता पसंद करते हैं और इसीलिए लिफाफे में बंद कर मन की बातें भेजकर मन हलका कर लेते हैं।

मन की भाषा प्राय: सरल और सुबोध ही होती है। लेकिन यह आवश्यक नहीं है। यह बात तो प्रेषिती पर निर्भर है कि उसका स्तर क्या है। अगर प्रेषक और प्रेषिती दोनों ही पक्ष क्लिष्टता पसंद करते
हैं तो पत्र की भाषा क्लिष्ट भी हो सकती है।

चूक तार अतिसंक्षिप्त होता है इसीलिए वह विषम परिस्थिति में ही व्यवहार में लाया जाता है। तार संवाद प्रेषण का सदाबहार माध्यम नहीं माना जाएगा। आज का युग भले ही विज्ञान का युग क्यों न हो, पत्र के सिवा दूसरा कोई संवाद का सशक्त माध्यम है ही नहीं।

इ-मेल से पत्र भेजा जा सकता है। लेकिन यह प्राय: एक-दो पृष्ठ से अधिक नहीं, लेकिन पत्र में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। आप चाहें तो बीस पृष्ठों का पत्र भी स्टेपल कर भेज सकते हैं।

मन की भावना पर विज्ञान का कोई प्रभाव नहीं है।  विज्ञान लाख प्रगति करे, मानव का विकल्प ‘रोबोट’ क्या, वह मानव ही क्यों न बना डालेपत्र उनके बीच अस्तित्व में रहेगा ही। मनुष्य की भावनाओं पर विज्ञान का कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता।

जिसके मन में प्रेम के भाव का उदय हो चुका है वह चाहे टूटी साइकिल से चलेद्रुतगामी रेल से या हवाई जहाज से चलेउसके मन में प्रेम और प्रेमी या प्रेमिका के प्रति आसक्ति रहेगी ही।

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