Hindi Story Of Akbar Birbal – अकबर बीरबल की कहनियाँ और किस्से हिंदी में 🎠⛲

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हूँ Hindi Story Of Akbar Birbal |  ये कहानियाँ बहुत रोचक और मज़ेदार है | इन कहानियो से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है  Hindi Story Of Akbar Birbal

hindi story of akbar birbal

तंत्र मंत्र – Hindi Story Of Akbar Birbal 🕵

एक बार कुछ दरबारियों ने महाराज अकबर से कहा महाराज, आजकल बीरबल को ज्योतिष का शौक चढ़ा है कहता फिरता है, मंत्रों से मैं कुछ भी कर सकता हूं। तभी दूसरे दरबारी ने कान भरे हां महाराज वह बहुत शेखी बघारता है। हम तो परेशान हो गये उससे दरबार के काम में जरा भी रुचि नहीं लेता।

राजा बोले अच्छा परखकर देखते हैं बीरबल के मंत्रों में क्या दम खम है। यह कहते हुए राजा ने एक दरबारी को अंगूठी देते हुए कहा तुम यह अंगूठी छुपा लो। आज इसी के बारे में पूछेगे। तभी बीरबल दरबार में आयाराजा को प्रणाम कर अपनी जगह जा बैठा। अकबर बोले बीरबल अभी अभी मेरी अंगूठी कहीं गायब हो गई। जरा पता लगाओ। सुना है, तुम तन्त्र-मन्त्र से बहुत कुछ कर सकते हो।

बीरबल ने कनखियों से दरबारियों की ओर देखा |वह समझ गया था कि उसके विरूद्ध राजा के कान डटकर भरे गए हैं। कुछ सोचकर उसने कागज पर आड़ी तिरछी रेखायें खींचीं। फिर बोला, महाराज आप इस पर हाथ रखें, अंगूठी जहां भी होगी, अपने आप अंगुली में आ जायेगी।

राजा ने उस तंत्र पर हाथ रख लिया तभी बीरबल चावल हाथ में लेकर दरबारियों की ओर फेंकने लगा। जिसके पास अंगूठी थी | वह सोचने लगा-कहीं सचमुच अंगूठी निकलकर राजा के पास न पहुंच जाए

उसने कसकर जेब पर हाथ रख लिया। बीरबल यह देख रहा था। बोला महाराज अंगूठी तो मिल गई।लेकिन उस दरबारी ने कसकर पकड़ रखी है। अकबर बीरबल का संकेत समझ हंस पड़े। उन्होंने अंगूठी पुरस्कार में बीरबल को दे दी । चुगली करने वालों के सिर शर्म से झुक गए।

Hindi Story Of Akbar Birbal – रानी की बात 👩‍🏭

एक बार महाराज अकबर रानी के आगे बीरबल की चतुराई की प्रशंसा कर रहे थे। रानी बोली महाराज कितना ही चतुर सही पर मुझसे हार जाएगा। महाराज अकबर ने कहा ठीक है। परीक्षा कर लेते
हैं। दूसरे दिन दरबार उठने के बाद महाराज ने बीरबल को महल में बुलवा लिया।

रानी ने बीरबल के लिए सुगंधित शर्बत और पुल मिठाई लाने के लिए आदेश दिया। दासी के जाते ही रानी गिनती गिनने लगी। एक से दस तक गिनती गिनकर बोली अब शर्बत गिलास में तथा मिठाई और फल तश्तरी में रख लिए हैं। सचमुच दासी अब सामान लिए मौजूद थी। रानी बोली बीरबल देखो हमारा कितना नपा तुला अन्दाज है।

कल हम तुम्हारे यहाँ दावत खाने आयेंगे। बीरबल ने सोचा रानी स्वयं दावत पर आने को कह रही है। जरूर कुछ दाल में काला है। फिर वह सारी बात समझ गया। बादशाह ने रानी से कहा आप तो बीरबल की परीक्षा लेने के लिए कह रही थीं ली क्यों नहीं ? रानी बोली कल बताऊंगी।

अगले दिन बादशाह और उनकी पत्नी वीरबल के घर पहुंचे| थोड़ी देर के बाद उसने सेवकों को खाना लगाने का आदेश दिया।

रानी बोली, बीरबल क्या तुम हमारी तरह गिनकर बता सकते हो, खाना कितनी देर में आ जाए। वह बोला रानी की, आपके सामने में बोलना अच्छा नहीं समझता। आप गिनती शुरू कीजिये ,जब आप रुकगी, तभी खाना हाजिर हो जायेगा । रानी के गिनती खत्म करते ही खाना आ गया |

बादशाह बोले रानी , बीरबल आपकी बात भाप गया। आप हार गई। तभी बीरबल बोला जीत रानी जी की हुई हैं खाना तो इन्ही के गिनने से आया है | रानी ने कहा बीरबल, तुम सचमुच दरबार के रत्न हो | हमें हराया वो भी हमें जीताकर |

Hindi Story Of Akbar Birbal – जगर-मगर   👶

बादशाह अकबर ने भारी सभा में घोषणा की इस बार मुहर्रम पर सभी दरबारी अपने महलों को अच्छी तरह सजाएं जिस महल में सबसे अच्छी रोशनी होगी, उसे पुरस्कार दिया जाएगा। मुहर्रम के दिन बादशाह घोड़े पर सवार होकर बीरबल के साथ दरबारियों के महलों की रोशनी देखने निकले | सभी के महल जगर-मगर कर रहे थे। बीरबल के महल के आगे राजा रुक गए। बोले बस दो चार दीपक! तुमने हमारी आज्ञा का पालन नहीं किया है।

बादशाह को लेकर बीरबल नगर के बाहर गरीबों की बस्ती में गया। वहां झोपड़ियां प्रकाश से दमदमा रही थी। बीरवल बादशाह अकबर से बोला-बादशाह, देखिए आपकी आज्ञा का मैने ही सही पालन किया है। इन्हें ही रोशनी की सबसे ज्यादा जरूरत है। बादशाह ने मुस्कुरा कर पुरस्कार की राशि गरीबों में बांट दी।

Hindi Story Of Akbar Birbal – तिनके का साहरा  ⛷

गर्मी के दिन थे। बादशाह अकबर दरबारियों के साथ नौका विहार के लिए गए। नौका नदी के बीच में पहुंची, तो राजा को विनोद सूझा। एक तिनका दिखाकर बोले जो इस तिनके के सहारे नदी पार करेगा, उसे मैं एक दिन के लिए विजयनगर का बादशाह बना ढूंगा। दरबारी एक दूसरे का मुंह देखने लगे। बीरबल बोला यह काम मैं कर सकता हूं, मगर बादशाह बनने के बाद।

बादशाह अकबर बोले ठीक है आज के लिए मैं तुम्हें बादशाह बनाता हूं। राज पाट, महल और अंगरक्षकों को मैं तुम्हें सौंपता हूं। इस तिनके को तुम राजदण्ड समझो। अब इसी के सहारे नदी पार करके दिखाओ। वरना मृत्युदण्ड मिलेगा। कहकर उन्होंने हाथ का तिनका बीरबल को दे दिया। बीरबल
तिनका लेकर नदी में कूदने को हुआ। कूदने से पहले उसने अंगरक्षकों से कहा इस समय मैं राजा हूं ।

सुनते ही अंगरक्षकों ने उसे पकड़ लिया। बोले आप राजा हैं इसलिए हम आपको जान जोखिम का काम नहीं करने देगे | बीरबल ने समझाया मगर वे नहीं माने। इतने में नौका दूसरे किनारे पर जा लगी। बादशाह अकबर बोले बीरबल तुम हार गये |

हार कहाँ गया जहांपनाह ? बीरबल बोला इस तिनके के सहारे तो मैने नदी पार की है ? यह मेरे पास न होता तो अंगरक्षक कूदने से भला क्यों रोकते ? तब मैं नदी में डूब जाता।

सुनते ही बादशाह अकबर हंसकर बोले बीरबल सचमुच तुमसे जीतना मुश्किल है।

अन्य लेख

Hindi Story Of Akbar Birbal – हज़ार जूते  🏋

अकबर बादशाह को ठठेबाजी का बड़ा शौक था और दैवयोग से बीरबल भी बड़ा ठठेबाज था। एक बार बादशाह ने  हंसी-हंसी में बीरबल के जूते चुरा लिये | चलते समय बीरबल जूता ढूढ़ने लगा। जब न मिले तो अकबर ने सेवक से कहा कि अच्छा हमारी और से इनको जूता दे दो। सुन नौकर ने जूता पहना दिया।
बीरबल ने जूता पहन करके आशीर्वाद दिया कि परमेश्वर आपको इस लोक और परलोक में ऐसे हजारों जूते दे। सुनते ही अकबर खिलखिला कर हंस पड़े।

Hindi Story Of Akbar Birbal – और क्या कढ़ी 🏵

एक दिन बीरबल को अपने किसी संबंधी के यहाँ निमंत्रण में जाना था, जिससे वह दरबार खत्म होने से पहले बादशाह से अवकाश ले विदा हुए। दूसरे दिन जब बीरबल आये तो बादशाह ने निमंत्रण के भोजन
के बारे में पूछना शुरू किया कैसा खाना बना था, क्या-क्या था आदि |

बीरबल ने कई पकवानों के नाम बतला दिये तथा आगे कुछ बतला रहे थे कि बादशाह ने उन्हें किसी दूसरे प्रश्न से उलझा दिया जिससे उनका कहना भी बन्द हो गया। इस घटना को हफ्तों गुजर गये |

एक दिन बादशाह दरबारियों के साथ दरबार में बैठे थे। अन्य दरबारियों के साथ बीरबल भी था। आज बादशाह को स्मरण आया कि बीरबल ने उस दिन कहते-कहते अधूरे में ही की भोजन सामग्री का वर्णन छोड़ दिया था और उन्हें आज बीरबल की स्मरण शक्ति की परीक्षा लेने की सूझी। वे बोले बीरबल! और क्या ?

बीरबल समझ गये कि उस दिन भोजन की सामग्री का नाम बतलाते-बतलाते मै किसी अन्य काम में लग गया था और यह बात अधूरी रह गई थी, बादशाह उसी को पूरा करने की वजह से पूछ रहे थे ? बीरबल ने तत्काल हो उत्तर दिया, और क्या ? कढ़ी ! बस बीरबल की इस गजब की स्मरण शक्ति से बादशाह बहुत ही खुश हुए और अपने गले से मोती की माला उतारकर बीरबल को दे दी।

उपस्थित मंडली यह न समझ सकी कि किस रहस्यमयी बात के ऊपर मोती को माला मिली है। उन लोगों ने विचार किया कि बादशाह को कढ़ी बड़ी प्रिय है। इसलिए बीरबल को मोती की माला मिली है। अन्य दरबारियों का भी जी ललचाया। मोती की माला पाने की सभी में इच्छा हुई।

दूसरे दिन बढ़िया-बढ़िया कढ़ी अपने यहाँ लोगों ने तैयार करवायी। जितना अच्छा तरीका वे जानते थे उसमें किसी किस्म की कमी बनाने में नहीं की गई। जब दरबार का समय हुआ तो नौकरो को देकर सब साथ चले।

बादशाह के सामने ले जाकर सबों ने अपनी कढ़ी की हांडो रखी बादशाह की समझ में पहले न आया

उन्होंने सभासदों से पूछा कि इसमें क्या है और किसलिए लाये हैं। सब दरबारियों ने हाथ जोड़कर निवेदन किया कि जहांपनाह! आपने कल इसी शब्द के कहने पर बीरबल को खुश होकर मोती की माला दे दी थी। हम लोगों ने समझा कि हजूर को कढ़ीबहुत पसन्द है। जिससे आज हम कढ़ी ही सेवा में भेंट करने के लिए लाये |

दरबारियों की मूर्खता पर बादशाह तिलमिला उठे, आवेश में आकर बुरा-भला कहकर सबको जेल में बन्द कर देने का हुक्म दिया तथा बोले तुम लोग नकल करना जानते हो दूसरे को फलते नहीं देख सकते जाओ इनका यही दण्ड है।

दरबारियों ने देखा कि हाथ जल रहे है तो सबने क्षमा प्रार्थना की तब बादशाह उन उनको दण्ड मुक्त कर दिया और बोले आज से प्रतिज्ञा करो कि बिना समझे बूझे किसी की नकल न करोगे सभासदों ने ऐसा ही किया।

Hindi Story Of Akbar Birbal – अधर महल  🏬

एक दिन दरबार के काम-काजों से निश्चित हो बादशाह बीरबल के साथ गप्प मार रहे थे। उसी दरमियान उनको एक अधर महल बनवाने की इच्छा हुई। उस अभिप्राय से प्रेरित होकर बोले
बीरबलः क्या तुम मेरे लिए एक अधर महल बनवा सकते हो ? बनवा देना तुम्हारा काम है और रुपया खर्च करना मेरा।

बीरबल ने सोच विचार कर उत्तर दिया पृथ्वीनाथ | थोड़ा ठहरकर महल बनवाने का कार्य आरंभ करूगा इस कार्य के लिए कुछ मुख्य मुख्य सामानों का संग्रह करना पड़ेगा। बादशाह इस पर राजी हो गया।
तब बीरबल ने एक दूसरी बात छेड़कर बादशाह का मन दूसरे कामों में उलझाकर सायंकाल का अवकाश पाकर घर लौट गया।

दूसरे दिन बहेलियों को रुपये देकर जंगल से तोतों को पकड़ लाने की आज्ञा दे दी। हुक्म को देर थी कि बहेलिये उस दिन सैकड़ों तोते पकड़ लाये। बीरबल ने चुन कर कुछ तोतों को खरीद लिया और
उनकी पढ़ाई का कार्य अपनी बुद्धिमत्ता कन्या को सौंप वह दरबार का आवश्यक कार्य करने लगा लड़की पिता के आदेशानुसार तोतों को पढ़ाकर पक्का कर दिया। जब बीरबल ने उनकी परीक्षा ली तो
वे मर्जी के माफिक निकले फिर क्या था, वह तोतों को लिए दरबार में हाजिर हुआ।

तोतों को दीवानेखास में बन्द कर बीरबल बादशाह के पास गया। तोते पिंजड़े से बाहर निकालकर छोड़ दिए थे। सब तरफ से किवाड़ बन्द थे। शिक्षा के अनुसार तोते भीतर राग अलाप रहे थे। बादशाह को सलाम कर बीरबल बोला पृथ्वीनाथ आपकी मर्जी के मुनासिफ अधर महल में काम लगवा दिया है। इस समय उसमें बहुत से पेशराज और मिस्त्री काम कर रहे हैं।

आप चलकर मुआयना कर लें। बादशाह महल देखने की इच्छा से बीरबल के साथ चला। जब बीरबल दीवानखाने के पास पहुंचा तो उसका किवाड़ खुलवा दिया। तोते बाहर आकाश में उड़ते हुए बोलने लगे ईट लाओ, चूना लाओ, किवाड लाओ , चौखट तैयार करो .दीवार चुनो। इस प्रकार तोतों ने आकाश में खूब शोर मचाया।

तब बादशाह ने बीरबल से पूछा-‘क्यों बीरबल यह तोते क्या कर रहे हैं? बीरबल ने अदबके साथ उत्तर दिया-महाराज! आपका अधर महल तैयार हो रहा है उसमें पेशराज और बढ़ई लोग लगे हुये हैं। सब समान एकत्रित हो जाने पर महल बनना शुरू हो जाएगा। बीरबल की इस बुद्धि पर बादशाह हार्षत हुआ और उसको बहुत सा धन देकर विदा किया।

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