Hindi Essay On Population 👯‍♂️ बढ़ती जनसंख्या की समस्या पर निबन्ध

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हूँ  Hindi Essay On Population |  हमारा ये लेख बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्दक है |  आईये शुरू करते है Hindi Essay On Population . हमारे ये प्रस्ताव आपके स्कूल के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है | इन प्रस्ताव से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है |

Hindi Essay On Population

Hindi Essay On Population – बढ़ती जनसंख्या की समस्या  

बढ़ती हुई आबादी भारत के लिए ही नहीं, विश्व के अनेक देशों के लिए समस्या बनी हुई है। यह कहा जाता है कि आबादी को नियंत्रित रखने के लिए प्रकृति के अपने तरीके हैं। प्रकृति कभी महामारीकभी भूकंप और कभी बाढ़ के द्वारा आवश्यकता से अधिक प्राणियों का स्वतही संहार करती रहती है, किंतु यह सिद्धांत अब पुराना पड़ चुका है। वैज्ञानिक आविष्कारों द्वारा इस प्रकार की अधिकांश दैवी आपत्तियों पर तो नियंत्रण किया जा चुका हैकिंतु मृत्युदर घट जाने और जन्मदर में कमी न होने के कारण जनसंख्या बड़ी तीव्र गति से बढ़ती जा रही है।

Hindi Essay On Population – जनसंख्या का आंकड़ा  🐦

सन् 1960 में विश्व की जनसंख्या तीन अरब थी और अनुमान है कि यदि इस जनसंख्या
की वृद्धि की गति को न रोका गया तो सन् 2000 तक विश्व की जनसंख्या साढ़े छ: अरब हो जाएगी। इतनी जनसंख्या के खान-पान, वस्त्रा, भरण और निवास की समुचित व्यवस्था करना बड़ा ही कठिन सिद्ध होगा। धनवान् देशों में तो आबादी का बढ़ावा फिर भी कम है और वे अपने संसाधनों से बढ़ी हुई जनसंख्या के भरणपोषण की उचित व्यवस्था कर सकते हैंकिंतु भारत जैसे विकासशील देश में जनसंख्या को अपेक्षा से अधिक वृद्धि उसकी सभी योजनाओं को विफल कर देती है।

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जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में चीन को छोड़कर भारत का अन्य सभी देशों में प्रथम
स्थान है। सन् 1891 में हमारे देश की जनसंख्या लगभग साढ़े तेईस करोड़ थी और तीस वर्ष की अवधि में अर्थात् सन् 1921 तक उसमें कोई खास वृद्धि न होकर मात्र डेढ़ करोड़ की ही वृद्धि हुई थी | किंतु अगले तीस वर्षों में भारत की जनसंख्या में बड़ी तेजी से वृद्धि हुई और वह  पच्चीस करोड़ दस लाख से बढ़कर लगभग दुगुनी हो गई। सन् 1951 में विभाजित भारत की ही जनसंख्या छत्तीस करोड़ हो गई थी। इसमें लगभग दस करोड़ वह जनसंख्या सम्मिलित नहीं है, जो पाकिस्तान के हिस्से में निवास करती थी।

Hindi Essay On Population – जनसंख्या से समस्या  🐶

इसके बाद भी जनसंख्या बड़ी ही तीव्र गति से बढ़ती गई है। सन् 1951 से 1961 के दशक में यह वृद्धि सात करोड़ इक्कीस लाख थी, अर्थात् 1961  में भारत की जनसंख्या लगभग साढ़े चैंतालीस करोड़ थी। जबकि 1995 में यह बानबे करोड़ से भी अधिक हो गई है । जनसंख्या को इतनी वृद्धि तो तब हुई है जबकि सरकार परिवार-नियोजन कार्यक्रम पर करोड़ों रुपए व्यय कर रही है, अन्यथा शायद दो-एक करोड़ आबादी और भी बढ़ गई होती।

यदि भारत की जनसंख्या इसी गति से बढ़ती रही तो सन् 2000 तक इसके एक अरब से ऊपर हो जाने की संभावना है । इस बढ़ती हुई जनसंख्या ने देश के सामने गरीबी,बेरोजगारी,अशिक्षा, भुखमरी आदि अनेक समस्याएँ उत्पन्न कर दी हैं। सरकार बार-बार पंचवर्षीय योजनाएँ बनाकर यह लक्ष्य निर्धारित करती है कि बेरोजगारी को मिटा दिया जाएगा | सभी बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल खोल दिए जाएँगे प्रति व्यक्ति की औसत आय बढ़ा दी जाएगीअन्नोत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की जाएगी

Hindi Essay On Population – जनसंख्या वृद्धि के उपाय  🎑

किंतु तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या उसके सभी प्रयासों को विफल कर देती है।अन्नोत्पादन की दृष्टि से हम एक बार आत्मनिर्भर हो भी गए थेकिंतु अब जनसंख्या इतनी तेजी से बढ़ी है कि पुन: भुखमरी की स्थिति आ गई। बेरोजगारी तो अनुदिन सुरसा की भाँति अपना मुंह फाड़े चली जा रही है। अगणित संख्या में स्कूल खोलते जाने पर भी बढ़ती जनसंख्या के कारण स्कूलों की संख्या इतनी नहीं हो पाती कि सभी बच्चों को उनमें प्रवेश मिल सके।

इन समस्याओं के कारण जिनका मूल कारण बढ़ती हुई जनसंख्या है, सरकार ने
परिवार-नियोजन की शरण ली है। परिवारनियोजन पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए व्यय किए जा रहे हैं, फिर भी जनसंख्या की वृद्धि रोकने की दिशा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। इसके दो कारण हैं-एक तो ग्रामीण जनता की अशिक्षा और उसमें परिवार नियोजन के साधनों का प्रचलित न होना, दूसरा कारण कतिपय धर्मावलंबियों की यह धारणा है कि हमें अपने संप्रदाय के लोगों की संख्या में वृद्धि करने की दृष्टि से परिवार-नियोजन के साधनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

Hindi Essay On Population – निष्कर्ष  🌁

अंतत: कहा जा सकता है कि यदि भारत को सुखसमृद्धि और उन्नति के शिखर की ओर ले जाना है, यदि बेरोजगारी, अशिक्षा, भुखमरी और गरीबी आदि समस्याओं से छुटकारा
पाना है, तो उसका एकमात्र इलाज है-जनसंख्या की वृद्धि को रोकना। यदि जनसंख्या की वृद्धि वर्तमान दर से ही होती रही तो देश का भविष्य अंधकारमय है।

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