Hindi Essay On Diwali – दिवाली पर निबंध हिंदी में पढ़े 📢🥁

Hindi Essay On Diwali

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हूँ   Hindi Essay On Diwali |  हमारा ये लेख बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्दक है |  इन प्रस्ताव से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है Hindi Essay On Diwali . हमारे ये प्रस्ताव आपके स्कूल के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है |

Hindi Essay On Diwali

 Hindi Essay On Diwali – दीपावली का महापर्व 

पर्व और त्योहार किसी भी जाति और राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक होते हैं। ये त्योहार राष्ट्र में लोगों के जीवन में स्फूर्ति प्रदान करते हैं। ये पर्व और त्योहार भी जाति के गौरव के प्रतीक होते हैं। भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से नेफा की ऊँचाइयों तक सैकड़ों त्योहार मनाए जाते हैं।

उत्तर भारत में दीपावली,वैशाखी, होली तथा जन्माष्टमी आदि त्योहार मनाए जाते हैं, तो दक्षिण में पोंगल का प्रसिद्ध त्योहार मनाया जाता है । यदि पूर्व में नवरात्रि और दुर्गापूजा की जाती है तो पश्चिम में राग-रागिनियों द्वारा तुलजा भवानी की पूजा होती है।

दिवाली का महत्व – Hindi Essay On Diwali

उत्तर भारत के प्रत्येक भारतीय के लिए दीपों का त्योहार दीपावली सबसे अधिक लोकप्रिय त्योहार है। यह बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात् सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। श्रीराम के लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीपक जलाए थे। उसी परंपरा के अनुसार आज भी लोग त्योहार इस को मनाते हैं

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दीपावली को आर्य समाजी, जैनी और सिक्ख लोग भी मनाते हैं । इस दिन आर्य समाज यूके संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने महासमाधि ली थी। इस दिन जैन धर्म के तीर्थकर महावीर स्वामी ने निर्वाण प्राप्त किया था | सिक्खों के छठे गुरु ने इसी दिन बंदीगृह से मुक्ति प्राप्त की थी।

घरो की सफाई -Hindi Essay On Diwali

 

इस वर्ष भी, इस पर्व का आरंभ हमेशा की तरह घरों की सफाई और सफेदी से हुआ । इस सफाई अभियान में मैंने भी योगदान दिया।कई दिन पूर्व सफाई इत्यादि समाप्त हो चुकी थी और आ पहुंचा वह दिन जिसकी बड़ी प्रतीक्षा थी और जगमगा उठा नगर-नगर, डगर -डगर।  दीपावली के टिमटिमाते दीपकों से |

दीवावली मनाने की विधि –Hindi Essay On Diwali

 

महंगाई के दिनों में भी हिंदू व सारा देश कितनी श्रद्धा और प्रेम से अपनी सांस्कृतिक संपदा का स्वागत करते हैं, यह देखते ही बनता है। न पटाखों की कमी, न मिठाइयों की दुकानों की कमी और न कमी हर्ष और उल्लास की। कमसेकम उस दिन तो ऐसा लगा कि घर-घर में लक्ष्मीका पदार्पण हो चुका है। मैंने भी लक्ष्मी-पूजन में भाग लिया और सारी रात घर में उजाला रखा ताकि कहीं अँधेरे की वजह से लक्ष्मी लौट न जाए।

सभी लोगों की तरह मैं भी सजधजकर अपने मित्रों के साथ बाजार में घूमने गया और मिठाई, खिलौने फुलझड़ियाँ और आतिश बाजी का सामान आदि खरीदा |

बुराईया – Hindi Essay On Diwali

कुछ लोग इस दिन जुआ भी खेलते हैं। मैं यह नहीं मानता कि जुआ खेलना इस त्योहार के साथ परंपरागत रूप से जुड़ा हुआ है। मैं तो यह जानता हूँ कि इस दुर्व्यसन से इस पर्व की पवित्रता नष्ट हो जाती है।

भारतीय संस्कृति के महाप्रतीक इस त्योहार को विधिपूर्वक ही मनाया जाना चाहिए।

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