Essay On Baisakhi In Hindi – बैसाखी पर निबंध- गौरव और महत्व 🎷

Essay On Baisakhi In Hindi

प्रिय दोस्तों मै  आज आपके लिए लेकर आया हू Essay On Baisakhi In Hindi |  हमारा ये लेख बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्दक है |  इन प्रस्ताव से हमें जीवन की नैतिक शिक्षा का ज्ञान होता है | आईये शुरू करते है Essay On Baisakhi In Hindi . हमारे ये प्रस्ताव आपके स्कूल के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है |

Essay On Baisakhi In Hindi – बैसाखी मेला 💐

Essay On Baisakhi In Hindi
हमारे देश में बहुत से मेले उत्सव और त्योहार मनाए जाते हैं। उनमें से वैशाखी का मेला भी एक मुख्य है । यह वैशाखी त्योहार यां मेला वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है, जो प्राय: 13 अप्रैल को पड़ता है। इस समय तक उत्तर भारत में गरमी आरंभ हो जाती है । शायद इसीलिए हमारे पूर्वजों ने इस मेले के लिए नदी के स्नान का रिवाज चलाया।

सवेरे चार बजे ही नींद छोड़कर लोग अपने संगी-साथियों के साथ नदी की ओर चल पड़ते हैं । इसलिए कि इस दिन नदी में स्नान करना बड़ा पवित्र माना जाता है । यों तो कई लोग इस दिन हरिद्वार जाकर गंगा मैया के पवित्र जल में स्नान करते हैं, पर जो वहाँ नहीं जा सकते वे अपने ही नगर के समीप की नदी के तट पर पहुँचते हैं । जहाँ नदी नहीं, वहाँ तालाब, नहर आदि के किनारे यह मेला लगता है। दिल्ली में यमुना-तट पर दिन चढ़ने से पहले ही लाखों लोग पहुँच जाते हैं फिर भी पूरे दिन जनता की एक नदी-सी उमड़ती दिखाई देती है।

Essay On Baisakhi In Hindi के बारे में

तट पर कपड़े उतारकर लोग ‘जय यमुना मैया’ कहते हुए जल में उतरकरस्नान करके तनमन को शांति प्रदान करते हैं । कई लोग भजन गाते , कई कीर्तन करते हैं। कई तट पर बने मंदिरों में भगवान् की पूजा करते हैं और कुछ घाट पर ही बैठकरआंखें मूंदकर प्रभु का ध्यान करते दिखाई देते हैं।

कुछ लोग जल में तैरते हुए व्यायाम करते हैं तो कुछ लोग छलाँ लगाकर तट पर दृष्टि अपार
तक जाती है, करते हैं। इस समय अनोखी शोभा होती है। जहाँ दिखाई पड़ता है। मंदिरों में घंटों-घड़ियालों और शंखों की आवाज गूंज उठती है।

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हवा में उड़ते जल के छीटे अंग-अंग को शीतल करते हैं। नर-नारी जहाँ भक्ति की और -किलकारियाँ मचाते दिखाई भरते और उछलकूद देते हैं। लगाते हैं वहाँ बालक बालिकाएँ कुछ दानी लोग स्नान के बाद तट पर आए ब्राह्मणों को दक्षिणा देते हैं। ऐसे में कुछ भिखारी भी दान पाने के लिए हाथ फैलाए दिखाई देते हैं। पूजापाठ और दान के बाद कुछ खानेपीने के कार्यक्रम चलते हैंकुछ स्त्रियाँ भक्ति के गीत गाने लगती हैं।

Essay On Baisakhi In Hindi कैसे मानते है🔍

कुछ लोग वेदों के मंत्र और प्रार्थना के श्लोक उच्चरित करते हैं। बहुत से गाँवों के नरनारी भी नगर के घाटों पर मेले की झाँकी देखने आ जाते हैं और जनता के अपार समुदाय को देखकर हैरान होते हैं कि ये लाखों लोग आ कहाँ से गए ? बच्चे स्नान के बाद पूरीमिठाई और फल आदि की दुकानों की ओर लपकते हैं। मनचाही वस्तु को पाकर वे खश होकर खाते-पीते हैं और मन में खुशी मनाते हैं कि ऐसे मेले
और त्योहार जल्दी-जल्दी आया करें।

पंजाब में वैशाखी का मेला बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। सतलुज ,व्यास, रावी चिनाब आदि नदियों या नहरों के किनारे लोग इकट्ठे होते हैं। गाँव के लोग कबड्डी कुश्ती आदि खेल खेलते हैं। कई लोग मुंह से दोहरी बंसरी बजाते हैं, जिन्हें अलगोजे’ कहा जाता है। कई जगह पशुओं की प्रदर्शनी भी होती है।
मेले और त्योहारों से राष्ट्रीय एकता बढ़ती है।

Essay On Baisakhi In Hindi का सन्देश 📍

राष्ट्र में प्रसन्नता तथा उत्साह की वृद्धि होती है। आगे कार्य करने की शक्ति परिवर्धित होती है। अत: हमें इन त्योहारों को बड़े उत्साह से मनाना चाहिए।

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