Dada Dadi Ki Kahaniyan – अनमोल और शिक्षाप्रद नई हिंदी कहानियाँ 😃🐯

dada dadi ki kahaniyan

हम अपने इस लेख में आपके लये लेकर आये है दादा दादी की अनमोल कहानियाँ | dada dadi ki kahaniyan बहुत ही रोचक और मज़ेदार है | 

dada dadi ki kahaniyan

1. झूठा डॉक्टर (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक बार एक मेंढक ने तालाब को छोड़कर एक झील में अपना नया घर बनाया। वह झील एक जंगल के बीचोंबीच स्थित थी। वहाँ उसे कोई दिखाई नहीं दिया। चूंकि वह अपने नए दोस्त बनाना चाहता था इसलिए वह एक बड़े से पत्थर पर चढ़कर बोला, ‘‘दोस्तो, मैं यहाँ पर नया हूं।

मैं आप सबसे मिलना चाहता हूँ और आप लोगों का दोस्त बनना चाहता हूँ। उसकी आवाज सुनकर अधिकतर जानवर जैसे- बकरी,घोड़ा, लोमड़ी, खरगोश, मोर और हाथी इत्यादि झील के पास आ गएतब मेंढक उनसे बोला, ‘हैलो दोस्तो! मैं डॉ० फ्रॉगी, एक डॉक्टर हैं और आप लोगों की बीमारियों का इलाज कर सकता हूं। मैं सभी जानवरों के लिए दवाइयाँ लेकर आया हूँ।

आप सभी अपनी बीमारियों के इलाज के लिए किसी भी समय मेरे पास आ सकते हैं।’ यह सुनकर वहाँ खड़ी चालाक लोमड़ी बोली, ‘यदि तुम सबका इलाज कर सकते हो तो फिर अपने लंगड़े पैरों का इलाज क्यों नहीं करते हो जिसकी वजह से तुम हर समय चारों ओर फुदकते रहते हो।”

ये सुनकर सभी जानवर हंसने लगे मेंढक इस तरह बोले अपने झूठ पर शर्मिदा रह गया।

2. बेचारा हिरन (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक बार जंगल के राजा शेर ने एक सियार को अपना मंत्री बनाया। सियार जहाँ कहीं भी शिकार देखता, तुरंत शेर को खबर देता। शेर उसे मारता, खाता। और जानवर के शरीर का कुछ हिस्सा सियार के लिए छोड़ देता।

एक दिन शेर बीमार पड़ गया। ऐसी हालत में वह शिकार नहीं कर सकता था। इसलिए वह सियार से बोला, ‘मैं बीमार और भूखा हूं। मेरे लिए कुछ भोजन की व्यवस्था करो” सियार शिकार की खोज में चल दिया। बहुत खोजने के बाद उसे एक हिरन दिखाई दिया। वह उसके पास जाकर बोला
‘‘हिरन, भाई! शेर तुम्हें अपना मंत्री बनाना चाहता है। इसलिए तुम मेरे साथ चलो’
हिरन उत्सुकतापूर्वक बोला,‘‘क्या तुम सच कह रहे हो?

जंगल का राजा मुझे अपना मंत्री बनाना चाहता है! ये तो मेरे लिए बडे सौभाग्य की बात है। चलो, चलो, अभी महाराज से मिलने चलते हैं।’ सियार हिरन को शेर की माँद मेंलेकर गया। हिरन को देखते ही शेर ने झपट्टा मारकर उसे मार दियाफिर शेर और सियार ने स्वादिष्ट भोज का खूब आनंद लिया। बेचारा हिरन भूल गया था कि लालच का फल बुरा होता है।

3. न्याय (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक बार एक क्रूर व्यक्ति ने धन के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। व्यापारी की हत्या करने के बाद जब वह वहाँ से भाग रहा था, तभी उसे व्यापारी के परिवारजनों ने देख लिया। वे सभी चिल्लाने लगे।

फलस्वरूप वहाँ पर लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई और वे लोग हत्यारे का पीछा करने लगे। दौड़ते-दौड़ते वह हत्यारा नदी के किनारे पहुंच गया। अचानक एक शेर ने उस पर हमला कर दिया।

यह देखकर वह अपनी जान बचाने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया। तभी उसे पेड़ की पत्तियों में से किसी के राने की आवाज सुनाई पड़ी। उसने वहाँ देखा तो उसे पेड़ की टहनियों से लिपटा हुआ एक बड़ा सा अजगर दिखाई दिया। वह हत्यारे को काटने के लिए ज्यों ही आगे बढ़ा, त्यों ही उसने नदी में छलाँग लगा दी।

लेकिन उसकी जिदगी का अंत निश्चित था। नदी के अन्दर रहने वाले एक मगरमच्छ ने उसके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए। इस तरह प्रकृति ने स्वयं ही हत्यारे का न्याय कर दिया था। उसने किसी की जान ली थी तो प्रकृति ने स्वयं उसकी जान लेकर उसे सजा दे दी थी।

4. तीन चोर (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

तीन चोर थे। एक दिन उन्होंने एक धनी व्यापारी के यहाँ चोरी की 1 बजे और करने के बाद वे एक घने जंगल में गए और उस धन को आपस में लगे। लेकिन उन्हें बड़े जोरों की भूख भी लगी थी।

इसलिए उन्होंने आपस में सलाह की कि पहले भोजन की व्यवस्था की जाएउसके बाद धन की हो।
तब उनमें से एक चोर भोजन लेने के लिए शहर चला गया। वह चोर शहर से भोजन खरीद लाया। लेकिन उसने उन दोनों के भोजन में भी जहर मिला दिया ताकि वह अकेला सारी दौलत को हड़प सके।

उधर जंगल में रूके हुए दोनों चोरों ने भी एक योजना बनाई। वे एक पेड़ के पीछे छिप गए। जब उनका साथी खाना लेकर आया तो उन्होंने उस पर प्रहार कर उसे मार दिया।

फिर वे खुशी-खुशी उसके द्वारा लाया गया भोजन खाने लगे। भोजन खाते ही उनकी हालत बिगड़ गई। शीघ्र ही वे भी मौत गोद में सो गए। इस तरह वे तीनों अपने दुष्कमों के शिकार बन गए।

5. चालाकी नहीं चली ।(Dada Dadi Ki Kahaniyan)

भोल और गोलू नामक दो कौवे अच्छे मित्र थे। एक दिन उन दोनों में अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए झगड़ा होने लगा। उन्होंने तय किया कि जो चुनौती को पूरा कर लेगा, वही श्रेष्ठ होगा।

चुनौती यह थी कि दोनों को अपनी चोंच में एक-एक भरा हुआ थैला लेकर उड़ना था। जो
अपने थैले को लेकर आकाश में अधिक ऊपर उड़ेगा, वही श्रेष्ठ होगा।

गोलू बहुत ही चालाक कौआ था। उसने अपने थैले में रूई और भोलू के थैले में नमक भरा और दोनों ने उड़ान भरी। जल्दी ही थैले का वजन कम होने के कारण गोलू भोलू से अधिक ऊपर उड़ने लगा। उधर भारी वजन होने के कारण भोलू ऊंची उड़ान भरने में असमर्थ था।

तभी बारिश शुरू हो गई। रूई पानी सोखने के कारण भारी हो गई और नमक घुलनशील होने के कारण पानी में घुल रह गया। इसके फलस्वरूप गोलू का थैला भारी और भोलू का थैला हल्का हो न, गया।

अब भोलू ने गोलू के मुकाबले अधिक ऊंची उड़ान भरी। इस तरह भोलू वह चुनौती जीत गया।

6. चतुर मेमना (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक भेड़िया भूखा था। वह भोजन की तलाश में जंगल में इधर से उधर भटक रहा था। तभी उसे नहर के किनारे से आती एक मेमने के मिमियाने की आवाज सुनाई पड़ी यह आवाज सुनकर उसका दिल खुशी से झूम उठा।

उसने मन ही मन सोचा,‘चलो अब अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ेगा क्यों न मैं इस मेमने को खाकर अपनी भूख शांत कर लें। उसने जल्दी से नहर के पास जाकर देखा कि सामने स्थित एक पहाड़ी पर
वह मेमना खड़ा है। उनके बीच पर्याप्त दूरी थी। भेड़िये के वहाँ पहुँचने से पहले मेमना भाग भी नहीं सकता था।

इसलिए भेड़िये ने एक योजना बनाई और बोला,”प्यारे छोटे मेमने! यहाँ नीचे चरागाह में आ जाओ। यहाँ पर चरने के लिए हरीहरी नर्म घास है। तुम यहाँ पर नहर का ठंडा मधुर जल भी पी सकते हो। चालाक की भाँपकर बोला”सुझाव के लिए मेमना भेड़िए चालाकी , धन्यवाद भेड़िए भाई।

लेकिन मैं यहीं पर ठीक हैं। यहाँ मेरे लिए पर्याप्त धातु है। इस तरह भेड़िए की योजना असफल हो गई किसी ने ठीक ही कहा है मक्कारी से होशियारी अच्छी होती है।

7. डरपोक सोनू (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

सोनू बड़ा डरपोक था। वह छोटी से छोटी आवाज से भी डर जाता था। एक दिन शाही संदेशवाहक ने पूरे गाँव में घोषणा की, ‘‘राजा ने राज्य के प्रत्येक युवा को शाही फौज में भर्ती होने का आदेश दिया है।प्रत्येक व्यक्ति के लिए इस आदेश का पालन करना अनिवार्य है।

सोनू राजाज्ञा मानने के लिए विवश था। इसलिए वह शाही फौज में भर्ती होने के लिए चल पड़ा रास्ते में जब वह एक जंगल से गुजर रहा था, तब उसे एक विशालकाय पेड़ के ऊपर बहुत से कौवे बैठे दिखाई दिए | वे बहुत अधिक शोर मचा रहे थे। ” कौओं की आवाज सुनकर सोनू डर के कारण वहीं पर रुक गया।

वह आगे बढ़ने की कोशिश करता, परन्तु उसके पैर उसका साथ नहीं दे रहे थे। सोनू वास्तव में हद से ज्यादा डरपोक था। उसे लगने लगा कि वे कौए उसे मार डालेंगे। तब वह डर के मारे काँपते हुए बोला, चिल्लाओ, और चिल्लाओ, परंतु तुम मुझे मार नहीं सकते”

इससे साबित होता है कि वह शाही सेना के योग्य ही नहीं था। इसलिए व्यक्ति को वही कार्य करना चाहिए जिसके वह योग्य हो।

8. सफलता का मंत्र (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक बार दो चूहे खेल रहे थे। वे एकदूसरे के पीछेपीछे दौड़ रहे थे। वे दौड़ते-दौड़ते एक दुग्धशाला म पहुँच गए। वहाँ भी एक-दूसरे के पीछे दौड़ते-दौड़ते वे दोनों दूध से भरे हुए एक बड़े से बर्तन में गिर गए।

वे दोनों ही तैरना नहीं जानते थे। इसलिए वे डूबने लगे। दोनों अपनी-अपनी जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष करने लगे। थोड़ी देर बाद उनमें से एक चूहा बोला,”प्रिय मित्रमुझे लगता है कि हम डूब जाएंगे और
हमें अब कोई नहीं बचा सकता।”

दूसरा चूहा बोला, “हमें इस विपदा के समय धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए और कोशिश जारी रखनी
चाहिए” लेकिन पहले चूहे ने कोशिश नहीं की और  वह दूध में डूब गया।

दूसरे चूहे ने अपने दोस्त को दूध में डूबता देख बाहर आने के लिए और तेजी से तैरने की कोशिश शुरू की। उसकी इस कोशिश से दूध मथने के लगा और थोड़ी ही देर में मलाई की एक मोटी परत दूध की सतह पर आ गई।

चूहा किसी प्रकार उस मलाई की परत पर चढ़ा और फिर उसने बर्तन से बाहर छलाँग लगा दी। किसी ने ठीक ही कहा है कि व्यक्ति को तब तक तो प्रयास करते रहना चाहिए, जब तक वह अपने मकसद में सफल न हो जाए|

9. बुद्धिमान गधा (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक बार एक गधा जंगल में नर्म हरी घास खाने में मग्न था। इधर एक शेर शिकार के इरादे से धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था। गधा इस बात से अंजान था।

शेर गधे के पास पहुंचा तो उसे देखकर गधा डर गया। शेर बहुत ही खतरनाक और भयानक लग रहा था। लेकिन गधा भी कम चालाक न था। वह बोला, ‘महाराज, मुझे आपको देखकर बहुत खुशी हुई मुझे आपका भोजन बनने में बड़ा गर्व होगा।

लेकिन उससे पहले मैं आपको गधे को सही तरीके से खाने की विधि बताता हूँ। कहते हैं कि गधे को पीछे के पैरों से खाना शुरू करना चाहिएइससे उसे खाने का स्वाद बढ़ जाता है।”

शेर ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया। फिर वह गधे को खाने के लिए उसके पीछे गया। जैसे ही शेर गधे के पीछे खड़ा हुआ, वैसे ही गधे ने शेर के मुंह पर बड़े जोर से लात मारी।

फलस्वरूप शेर नीचे झाड़ियों में जा गिरा। जब तक शेर उठता, तब तक गधा वहा से दूर भाग चुका था।

10. हाथी के दाँत (Dada Dadi Ki Kahaniyan)

एक बार एक भूख चूह का एक अखरोट मिला उसने उसे तोड़ने की । बढ़त कोशिश की, लेकिन उसका छिलका कठोर होने के कारण वह उसे तोड़ने में। असफल रहा। चूहे के छोटे-छोटे दाँत उसे तोड़ने में असमर्थ थे।

तब वह चिढ़कर बोला, “हे भगवान! तुमने मुझे इतने छोटे-छोटे दाँत क्यों दिए? मेरे पास भोजन है, लेकिन मैं उसे खा नहीं सकता।”उसकी आवाज सुनकर भगवान प्रकट हुए और बोले‘प्रिय चूहे, जाओ और दूसरे जानवरों के दाँत देखो तुम्हें जिसके भी दाँत पसंद आएंगे मैं तुम्हें वैसे ही दाँत दे दूंगा ।

खुश होकर चूहा विभिन्न जानवरों की खोज में गया।उसने बहुत सारे जानवरों के दाँत देखे अन्तत: वह
हाथी के लंबे, सफेद दाँत देखकर बड़ा प्रभावित हुआ।

उसने हाथी के पास जाकर उससे पूछा ‘‘दोस्त, क्या तुम अपने दाँतों से खुश हो?” यह सुनकर हाथी बोला,‘अरे। मेरे दोस्त, मेरे दाँत तो सिर्फ दिखाने के लिए हैं। मैं इनका प्रयोग कुछ खाने के लिए नहीं कर सकता हूँ।

उल्टे मैं अपने इन दाँतों से भारी सामान उठाने का कार्य करता हूं।” यह सुनकर चूहे ने अपने
छोटे दाँतों के लिए भगवान को शुक्रिया अदा किया।

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