Berojgari Essay In Hindi – बेरोज़गारी की समस्या पर निबन्ध 🙇‍♀️

Berojgari Essay In Hindi

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Berojgari Essay In Hindi

Berojgari Essay In Hindi – बेकारी की समस्या के👯‍♂️

भारतवर्ष जितना ही प्राचीन और विशाल देश है, उसकी समस्याएँ भी उतनी ही विस्तृत विकट हैं। भारतीय नेताओं के सम्मुख नित्य अनेक जटिल प्रश्न आते रहते हैं। कुछ प्रश्नों का समाधान अल्प समय में कर लिया जाता है, कुछ के समाधान में कुछ समय लग जाता है | परन्तु कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं, जिनका समाधान नहीं निकलता और वे दिन-पर-दिन उलझते जाते हैं। स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् भारत के सम्मुख राजनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक आदि विविध क्षेत्रों में अनेक जटिल प्रश्न आए।

बेकारी की समस्या भी उन्हीं में से एक है। बेकारी की समस्या एक व्यापक समस्या है। इससे प्राय: अन्य अनेक नई समस्याओं का जन्म होता है । बेकारी के कारण समाज में भ्रष्टाचार, चरित्र हीनता, चोरी हत्या आदि विविध समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। फलत:समाज में अशांति का सूत्रपात होता है। अत: बेकारी की समस्या के समाधान के उपाय अवश्य निकालने चाहिए। इन उपायों की खोज करने से पूर्व बेकारी के कारणों की जाँच कर लेना उपयुक्त होगा।

Berojgari Essay In Hindi – बेरोजगारी के कारण 🕺

भारत में बेकारी का मूल कारण है-अत्यधिक आबादी। आज किसी विभाग में यदि दो रिक्त पदों की सूचना दी जाए तो दो सौ प्रार्थी उपस्थित हो जाते हैं । यह दशा शिक्षित-अशिक्षित, पुरुषनारी सभी वर्गों में है। गाँवों में जिस जगह पर एक व्यक्ति अकेले खेती कर सकता है, उसी जगह पर परिवार के अन्य दो-चार सदस्य और मिल जाते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति का कार्य पाँच व्यक्तियों में बँट जाता हैकिंतु इससे उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती। यदि एक व्यक्ति कार्य करे तो शेष चार व्यक्ति बेकार रहते हैं। इससे व्यक्तियों की कार्यक्षमता का पूर्ण प्रयोग नहीं हो पाता और वे धीरे-धीरे आलसी होते जाते हैं तथा व्यसनों में फंस जाते हैं।

भारत जैसे अधिक जनसंख्यावाले देश के लिए कुटीर उद्योग अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो उद्योग कतु एक ओर देश की जनसंख्या दिन-दुगुनी बढ़ती जा रही है तो दूसरी ओर कुटीर लाप होता जा रहा है। कुटीर उद्योगों में अपेक्षाकृत अधिक लोग कार्यरत रह सकते हैं। हस्तशिल्प का लोप हो जाने से हस्तशिल्पियों का वर्ग एकदम बेकार हो गया है।

Berojgari Essay In Hindi – बेरोज़गारी एक समस्या 🧗‍♂️

शिक्षा का अभाव भी बेकारी का कारण बताया जाता है, किंतु भारत में यह बात सर्वथा सत्य नहीं है। यहाँ बेकारी की संख्या में शिक्षित लोगों का प्रतिशत अधिक है। व्यवसायप्रद या उचित शिक्षा के अभाव में यहाँ शिक्षित लोग भी बेकार हैं । प्रतिवर्ष विश्वविद्यालयों से स्नातकों और स्नातकोत्तरों की बड़ी संख्या परीक्षाएँ उत्तीर्ण करके रोजगार दफ्तर के सामने कतारों में खड़ी रहती है। दो वर्षचार वर्ष और कभी-कभी आठ दस वर्ष तक भी किसी को नौकरी नहीं मिलती, क्योंकि क्लर्क के अतिरिक्त कुछ करना उनके बूते की बात नहीं होती और दफ्तरों में क्लक या बाबुओं की उतनी जगह रिक्त नहीं होतीं। इसके विपरीत योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए प्रतिवर्ष सहस्रों नए तकनीशियनों की आव श्यकता रहती है कुल मांग का पचास प्रतिशत भी मुश्किल से प्राप्त होता है, शेष स्थान रिक्त पड़े रहते हैं या फिर विदेशों से द्विगुण वेतन पर तकनीशियनों को बुलाना पड़ता है। इससे प्रत्यक्ष हानि यह होती है कि योजना-कार्य की गति धीमी पड़ जाती है और देश का बहुत-सा धन बाहर चला जाता है।

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जातिगत रूढ़ियों से बँधे रहना भी बेकारी के कारणों में से एक है। उदाहरण के लिए ब्राह्मण का लड़का भूखों मर जाएगा, किंतु खेती या अन्य किसी प्रकार की दस्तकारी का कार्य करना पसंद नहीं करेगा। ग्रामीण लोगों में यह प्रवृत्ति पाई जाती है कि वे अपने गाँव को छोड़कर कहीं बाहर जाना पसंद नहीं करते।

Berojgari Essay In Hindi – बेरोज़गारी के निदान  🌺

गाँव में आधे पेट भोजन करके रहना वे अपने लिए अधिक श्रेयस्कर समझते हैं।अशिक्षा,आलस्य आदि ऐसे ही कुछ अन्य कारणों से भी बेकारी की समस्या इस देश से दूर नहीं हो पाती। बेकारी की समस्या से मुक्ति पाने के लिए यह आवश्यक है कि उपर्युक्त सभी कारणों का निवारण किया जाए। इसके लिए यह आवश्यक है कि जनसंख्या की वृद्धि की गति को कम किया जाए। साथ ही देश में सभी प्रकार के कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए इससे बेकार लोगों को कार्य प्राप्त होगा, देश में उत्पादन और व्यवसाय दोनों की वृद्धि होगी।

Berojgari Essay In Hindi -बेरोज़गारी में सुधार  🛠

भारत की शिक्षा-पद्धति में भी सुधार की आवश्यकता है। योजनाओं के अंतर्गत नएनए सहनों तकनीशियनों की प्रत्येक वर्ष आवश्यकता रहती है। अतदेश में तकनीकी शिक्षा का बहुत तेजी से प्रसार होना चाहिए। छात्रों को अधिक-से-अधिक टेक्नीकल शिक्षा चाहिए। मात्र पैतृक व्यवसाय की विचारधारा के लोगों को रूढ़िमुक्त होना चाहिए। सभी प्रकार के भेदभाव त्याग कर मानव मात्र को एक मानकर अवसरानुरूप कार्य में लग जाना इन्ही उपायों से देश में व्याप्त बेकारी की समस्या दूर होगी और हमारा देश उन्नतिसुख के उच्चतम शिखर तक पहुँच सकेगा।

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